नई दिल्ली। कन्या पूजन नवरात्रि के आठवें दिन (अष्टमी) को विशेष रूप से किया जाता है. इस दिन नौ दिन तक शक्ति की आराधना करने के बाद मां दुर्गा के नौ रूपों में से कन्या स्वरूप का पूजन किया जाता है. माना जाता है कि इस दिन कन्याओं की सेवा करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है.
साल 2025 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से हो चुकी है. साल 2025 में शारदीय नवरात्रि में अष्टमी तिथि 30 सितंबर, मंगलवार के दिन पड़ रही है. इस दिन कन्या पूजन किया जाता है और मां दुर्गा को हलवा, पूड़ी का भोग लगाया जाता है.
कन्या पूजन का महत्व
- कन्या पूजन में छोटी कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है.
- कन्या पूजन करना नवरात्रि के व्रत के बाद जरूरी होता है, ऐसा करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है.
- पूजा से जीवन में धन, स्वास्थ्य और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है.
- कितनी कन्याओं को बैठाना शुभ होता है?
- परंपरा के अनुसार 9 कन्याओं को आमंत्रित करना सर्वोत्तम माना गया है.
- यह संख्या मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक है.
- अगर 9 कन्याओं की व्यवस्था न हो सके तो 3 या 5 कन्याओं को बैठाना भी शुभ माना जाता है.
- कन्याओं की उम्र सामान्यत- 2 से 10 वर्ष के बीच होनी चाहिए.
कन्या पूजन की विधि
- इस दिन सुबह स्नान के बाद साफ और स्वच्छ कपड़ पहनें.
- पूजा स्थल की साफ करें और माता की मूर्ति के सामना दीपक जलाएं.
- माता को फूल अर्पित करें, माता की आरती करें
कन्याओं का स्वागत
- कन्याओं के पैर धोकर उन्हें बैठक पर बिठाएं.
- हल्दी, रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें.
- कन्याओं को भोग लगाएं. उन्हें हलवे का प्रसाद दें.
- उनसे आशीर्वाद लें और उनके पैरों को छूकर सम्मान करें.
- कन्याओं को कुछ पैसे, मिठाई या कपड़े भेंट करें, उनकी प्रिय चीजें दें.
- इससे घर में लक्ष्मी और दुर्गा का विशेष आशीर्वाद माना जाता है.
शुभ दिशा और समय
- कन्या पूजन के लिए पूर्व या उत्तर दिशा शुभ मानी जाती है.
- अष्टमी के दिन प्रातःकाल कन्या पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है.

























































