नई दिल्ली. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लगाया है तो सरकार ने अपने निर्यातकों की सुरक्षा के लिए 45 हजार करोड़ रुपये की योजना शुरू कर दी है. सरकार ने निर्यातकों की सहायता के लिए 45,000 करोड़ रुपये की दो योजनाओं को मंजूरी दी है. इस पहल का मकसद निर्यातकों को उच्च अमेरिकी शुल्क के प्रभाव से निपटने में मदद करना है.
सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 25,060 करोड़ रुपये की निर्यात संवर्धन मिशन योजना का उद्देश्य विशेष रूप से एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम), पहली बार निर्यात करने वाले और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता को मजबूत करना है. दूसरी 20 हजार करोड़ की योजना निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएसई) है. यह निर्यातकों को बिना किसी गारंटी के कर्ज उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई है.
ट्रेड डील पर चल रही बात
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 27 अगस्त से भारतीय वस्तुओं पर 50 फीसदी का भारी शुल्क लगा दिया था, जिसके कारण अरबों डॉलर के निर्यात पर असर पड़ा है. फिलहाल भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी बातचीत कर रहे हैं. निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) को दो उप-योजनाओं, निर्यात प्रोत्साहन और निर्यात दिशा के माध्यम से छह साल के लिए चलाया जाएगा. निर्यात प्रोत्साहन पर 10,401 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा, जबकि निर्यात दिशा पर 14,659 करोड़ रुपये खर्च होंगे.
किन सेक्टर को मिलेगा फायदा
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने योजना की जानकारी देते हुए बताया कि यह एक व्यापक मिशन है और यह पूरे निर्यात परिवेश को सहयोग प्रदान करेगा. मिशन के तहत हाल ही में वैश्विक शुल्क वृद्धि से प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिक आधार पर सहायता प्रदान की जाएगी. इन क्षेत्रों में वस्त्र, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पाद शामिल हैं. इन क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. हाई टैरिफ के कारण सितंबर में अमेरिका को भारत का वस्तु निर्यात 11.93 फीसदी घटकर 5.46 अरब डॉलर रह गया.
निर्यात प्रोत्साहन में कैसी मदद मिलेगी
निर्यात प्रोत्साहन के अंतर्गत ब्याज सहायता, तत्काल नकद के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचे गये सामान के बिलों की बिक्री (निर्यात फैक्टरिंग), कर्ज सुविधा, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड और नए बाजारों में विविधीकरण के लिए कर्ज वृद्धि सहायता जैसे विभिन्न साधनों के माध्यम से एमएसएमई के लिए किफायती व्यापार वित्त तक पहुंच में सुधार पर ध्यान दिया जाएगा. हालांकि, अभी कर्ज पर सब्सिडी वाले ब्याज का खुलासा नहीं किया गया है.
निर्यात दिशा में क्या मदद
दूसरी योजना निर्यात दिशा के अंतर्गत, गैर-वित्तीय सहायता पर ध्यान दिया जाएगा जो बाजार के लिए तैयार रहने में सहायता के साथ प्रतिस्पर्धी क्षमता को बढ़ाते हैं. इसमें निर्यात गुणवत्ता और अनुपालन सहायता, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग, पैकेजिंग और व्यापार मेलों में भागीदारी, निर्यात भंडारण और लॉजिस्टिक और व्यापार के बारे में सटीक जानकारी और क्षमता निर्माण पहल शामिल हैं. निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएसई) को 100 प्रतिशत ऋण गारंटी प्रदान करने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लि. (एनसीजीटीसी) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा, ताकि एमएसएमई सहित निर्यातकों को वित्तीय संस्थान अतिरिक्त ऋण सहायता प्रदान कर सके.
1,000 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव की अध्यक्षता में गठित एक प्रबंधन समिति इस योजना की प्रगति और क्रियान्वयन को देखेगी. सीजीएसई योजना से भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ने और नए तथा उभरते बाजारों में विविधीकरण को समर्थन मिलने की उम्मीद है. सीजीएसई के तहत बिना किसी गारंटी के ऋण पहुंच की सुविधा से नकदी की स्थिति मजबूत होगी, सुचारू कामकाज सुनिश्चित होगा और 1,000 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति को गति मिलेगी. निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो ने इस योजना का स्वागत किया है.

























































