नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 7वें वेतन आयोग की 10 साल की अवधि 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है। सरकार ने 8वें वेतन आयोग को अधिसूचित कर दिया है और इसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) भी फाइनल हो चुके हैं। जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में आयोग ने काम शुरू कर दिया है। हालांकि, अब तक लागू होने की तारीख पर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। जानकारों का मानना है कि वेतन आयोग की सिफारिशें जनवरी 2026 के बजाय 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में लागू हो सकती हैं।
जनवरी 2026 से लागू होंगी सिफारिशें
देरी का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों को नुकसान होगा। उल्टा, अगर सिफारिशें जनवरी 2026 से लागू मानी गईं और भुगतान 2028 में हुआ, तो कर्मचारियों को मोटा अरियर मिल सकता है। आयोग को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय मिला है और उसके बाद सरकार को मंजूरी देने में 3 से 6 महीने लग सकते हैं। इसी वजह से देर होना लगभग तय माना जा रहा है। पिछली बार भी 7वें वेतन आयोग में ऐसा ही हुआ था और कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ा भुगतान मिला था।
कितनी हो सकती सैलरी बढ़ोतरी
जहां तक सैलरी बढ़ोतरी की बात है, तो बाजार के जानकारों और ब्रोकरेज फर्म्स का अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग में 30 से 34 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सबसे बड़ा आधार होगा नया फिटमेंट फैक्टर, जो 1.83 से 2.46 के बीच रह सकता है। कई रिपोर्ट्स में फिटमेंट फैक्टर करीब 2.28 रहने की बात कही जा रही है। साथ ही, पहले की तरह DA को बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाएगा और उसके बाद नया वेतन ढांचा लागू होगा।
अगर उदाहरण से समझें, तो लेवल-1 के कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है। आज उसकी कुल सैलरी करीब 35,000 रुपये के आसपास बनती है। अगर 34 फीसदी की बढ़ोतरी होती है, तो नई सैलरी लगभग 46,900 रुपये हो सकती है। यानी हर महीने करीब 11,900 रुपये ज्यादा। अगर जनवरी 2028 में वेतन आयोग लागू होता है और जनवरी 2026 से अरियर मिलता है, तो 24 महीने का अरियर करीब 2.8 से 3 लाख रुपये तक बन सकता है। ऊंचे पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह रकम और भी ज्यादा होगी। इसलिए कर्मचारियों की नजर अब फिटमेंट फैक्टर, लागू होने की तारीख और सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।

























































