नई दिल्ली। वैज्ञानिकों को सूर्य के करीब एक अजीब हलचल दिखाई पड़ी हैं। जिससे दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंसियां हाई अलर्ट पर है।भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) समेत कई एजेंसियां संभावित रेडियो ब्लैकआउट की स्थिति पर कड़ी नजर रख रही हैं। इन सोलर फ्लेयर्स की वजह से सैटेलाइट संचार, नेविगेशन और बिजली ग्रिड पर असर पद सकता है। इसरो के अधिकारी 50 से अधिक सक्रिय भारतीय उपग्रहों की लगातार निगरानी कर रहे हैं, ताकि किसी भी बुरे नतीजे से बचा जा सके।
सूर्य की इस फ्लेयर्स का कारण क्या है?
- सूर्य की सतह पर सक्रिय क्षेत्र 14366 नाम की एक सनस्पॉट ग्रुप की अचानक एक्टिव होने की वजह से यह हलचल शुरू हुई।
- इस क्षेत्र से कई विस्फोट हुए, जिनमें चार शक्तिशाली सोलर फ्लेयर्स शामिल हैं। इनमें X8.1 क्लास का फ्लेयर सबसे मजबूत था, जो 2026 का अब तक का सबसे तीव्र विस्फोट है।
- NASA ने पुष्टि की कि ये फ्लेयर्स 1 और 2 फरवरी के बीच चरम पर थे, जिसमें X8.1 फ्लेयर 1 फरवरी को हुआ।
- यह घटना अक्टूबर 2024 के बाद सबसे तेज है और 1996 से रिकॉर्ड किए गए सबसे ज्यदा 27 शक्तिशाली फ्लेयर्स में शुमार है।
- NASA की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने इन विस्फोटों को कैद किया है। बता दें, सूर्य हर 11 सालों में सक्रियता के चक्र से गुजरता है और यह तूफान सोलर मैक्सिमम का हिस्सा है।
पृथ्वी और भारत पर पड़ने वाला प्रभाव
- यह शक्तिशाली फ्लेयर्स इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण के बड़े विस्फोट पैदा करते हैं, जो प्रकाश की गति से पृथ्वी तक पहुंचते हैं।
- हालांकि ये जमीन पर मनुष्यों को सीधा नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन वायुमंडल की आयनोस्फीयर परत को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।
- इससे हाई फ्रिक्वेंसी रेडियो संचार में ब्लैकआउट, नेविगेशन सिग्नल में रुकावट, सैटेलाइट पर विकिरण बढ़ोतरी और ध्रुवीय क्षेत्रों में उड़ानों के लिए खतरा पैदा होता है।
- साथ ही, ऑरोरा (ध्रुवीय क्षेत्रों में रात के समय आकाश में दिखने वाली रंगीन प्रकाश) की गतिविधि बढ़ जाती है।
इस तूफान पर कड़ी निगरानी क्यों?
वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी अब तक बड़े कोरोनल मास इजेक्शन (CME) से बची हुई है, जो जियोमैग्नेटिक तूफान ला सकता है।
भारत का आदित्य-L1 मिशन अग्रणी भूमिका में
- भारत की पहली सोलर ऑब्जर्वेटरी आदित्य-L1 इस तूफान की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। L1 लैग्रेंज पॉइंट पर स्थित यह मिशन रीयल-टाइम डेटा प्रदान करता है, जिससे इसरो पहले से चेतावनी जारी कर पाता है।
- 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST) की घोषणा की, जिसकी लागत 1000 करोड़ रुपये होगी।
- यह लद्दाख के मेराक में बनेगा और पांच वर्षों में तैयार होगा। NLST सोलर फ्लेयर्स और स्पेस वेदर की समझ बढ़ाएगा।
- वर्तमान में कोई बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन सूर्य की अस्थिरता बनी हुई है। वैज्ञानिक हाई अलर्ट पर हैं।

























































