नई दिल्ली: टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है और इसका असर हेल्थ सेक्टर में भी दिखने लगा है। ऐसे में नई दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में जियो ने एक ऐसा मॉडल पेश किया, जो प्राइमरी हेल्थकेयर की तस्वीर बदल सकता है। ‘जियो आरोग्य AI’ नाम का यह सिस्टम एक AI-पावर्ड क्लिनिक मॉडल है, जो मरीजों की शुरुआती जांच कुछ ही मिनटों में कर सकता है।
इस मॉडल का मकसद खासतौर पर उन इलाकों तक बेहतर हेल्थ सुविधा पहुंचाना है, जहां डॉक्टरों की कमी है या अस्पताल दूर हैं। जियो का कहना है कि यह सिस्टम मरीज के जरूरी हेल्थ पैरामीटर्स की स्क्रीनिंग कर संभावित रिस्क पहचान सकता है और जरूरत पड़ने पर सीधे डॉक्टर से जोड़ सकता है। खास बात यह है कि इसमें ‘वॉयस AI डॉक्टर’ भी शामिल है, जो कई भारतीय भाषाओं में मरीज से बात कर सकता है।
मिनटों में हेल्थ स्क्रीनिंग
जियो का दावा है कि यह सिस्टम मरीजों की शुरुआती जांच कुछ ही मिनटों में कर सकता है। आमतौर पर प्राइमरी हेल्थ सेंटर में मरीज को पहले रजिस्ट्रेशन और फिर डॉक्टर का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन इस मॉडल में AI पहले स्तर की स्क्रीनिंग कर लेता है। इससे समय की बचत हो सकती है और मरीज को जल्दी दिशा मिल सकती है कि आगे क्या करना है।
स्मार्ट मिरर से होगी हेल्थ चेकिंग
इस सिस्टम में एक AI-एनेबल्ड डिवाइस लगाया गया है, जिसे स्मार्ट मिरर कहा गया है। मरीज इसके सामने खड़ा होता है और यह आंखों, त्वचा और चेहरे के अन्य संकेतों के आधार पर जरूरी रीडिंग लेता है। AI इन डाटा को तुरंत प्रोसेस करता है और एक शुरुआती हेल्थ रिपोर्ट तैयार करता है। कंपनी का कहना है कि यह प्रोसेस आसान और तेज है, जिससे बेसिक चेकअप के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
‘वॉयस AI डॉक्टर’ से सीधे बातचीत
अगर मरीज अपनी परेशानी बताना चाहता है तो वह ‘वॉयस AI डॉक्टर’ से सीधे बात कर सकता है। मरीज अपनी समस्या बोलकर बता सकता है और जरूरत पड़ने पर AI उससे कुछ और सवाल भी पूछता है। यानी अलग-अलग राज्यों के लोग अपनी भाषा में बात कर सकते हैं, जिससे समझने में आसानी होगी।
जियो का दावा है कि ‘जियो आरोग्य AI’ मरीजों को अलग-अलग कैटेगरी में बांट सकता है। जिन लोगों की स्थिति सामान्य होती है, उन्हें बेसिक सलाह मिलती है, जबकि गंभीर मामलों को प्राथमिकता के आधार पर डॉक्टर के पास भेजा जाता है। इससे डॉक्टरों का रूटीन वर्कलोड कम हो सकता है और वे ज्यादा जरूरी मामलों पर ध्यान दे सकते हैं।
प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स को AI-इनेबल्ड बनाने की प्लान
जियो का मानना है कि जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है, वहां इस मॉडल को आसानी से लागू किया जा सकता है। पोर्टेबल एक्स-रे और पोर्टेबल ईसीजी जैसे डिवाइस भी इससे जोड़े जा सकते हैं। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर मरीज को ऑनलाइन कंसल्टेशन की सुविधा भी मिल सकती है।

























































