नई दिल्ली। सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) क्लेम करने के नियमों में बड़ा बदलाव आने वाला है। नए आयकर कानून 2025 को लागू करने के लिए बनाए गए ड्राफ्ट इनकम-टैक्स रूल्स 2026 में केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने प्रस्ताव दिया है कि अब HRA डिक्लेरेशन फॉर्म में किरायेदार को मकान मालिक के साथ अपने रिश्ते की जानकारी भी देनी होगी। अप्रैल 2026 से नया टैक्स फ्रेमवर्क लागू होने की तैयारी है। अब तक कर्मचारी सिर्फ रेंट रसीद और तय सीमा से ज्यादा सालाना किराया होने पर मकान मालिक का PAN देते थे, लेकिन अब ‘रिश्ता क्या है’ यह भी बताना जरूरी होगा।
क्या है जानकारों की राय
पहली नजर में यह बदलाव छोटा लग सकता है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसका असर खासतौर पर उन लोगों पर पड़ेगा जो अपने माता-पिता, ससुराल पक्ष या अन्य रिश्तेदारों को किराया देकर HRA क्लेम करते हैं। अब तक अगर रेंट एग्रीमेंट सही था, किराया बैंक के जरिए दिया जा रहा था और मकान मालिक अपनी आयकर रिटर्न में किराये की आय दिखा रहा था, तो आमतौर पर दावा स्वीकार हो जाता था। लेकिन नए नियमों में “रिलेशनशिप” का कॉलम जोड़ने से विभाग के पास ऐसे मामलों को डेटा एनालिटिक्स के जरिए ट्रैक करने का सीधा आधार मिल जाएगा।
क्या है डिटेल
ड्राफ्ट नियमों के तहत विभाग आसानी से यह मिलान कर सकेगा कि जिस व्यक्ति को किराया दिया जा रहा है, उसने अपनी ITR और AIS में वह आय दिखाई है या नहीं। साथ ही यह भी जांच संभव होगी कि संपत्ति वास्तव में उसी मकान मालिक के नाम है या नहीं और किराया बैंकिंग चैनल से गया है या नहीं। यानी पहले जो बातें सिस्टम में बड़े स्तर पर पकड़ना मुश्किल था, अब वे तकनीक की मदद से साफ दिखाई दे सकती हैं। इससे फर्जी या सिर्फ कागजी किराये के इंतजाम पर रोक लगाने की कोशिश मानी जा रही है।
नियम यह भी साफ करते हैं कि अगर व्यवस्था वास्तविक है तो माता-पिता या अन्य करीबी रिश्तेदार को दिया गया किराया भी वैध माना जाएगा। लेकिन तय सीमा से ज्यादा किराये पर TDS नियम लागू हो सकते हैं। ऐसे में किरायेदार को Section 194-I के तहत टैक्स काटना पड़ सकता है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो पेनल्टी लगने का खतरा रहेगा। वहीं गलत जानकारी देने या आय छिपाने पर Section 270A के तहत 200% तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
टैक्स सलाहकारों की राय
टैक्स सलाहकारों का कहना है कि अगर ड्राफ्ट नियम इसी रूप में लागू होते हैं तो परिवार के भीतर किराया देने वाले कर्मचारियों को ज्यादा सतर्क रहना होगा। साफ-सुथरा रेंट एग्रीमेंट बनवाएं, किराया केवल बैंक से ट्रांसफर करें, मकान मालिक रिटर्न में आय दिखाए और संपत्ति के कागज संभालकर रखें। सरकार का मकसद सिस्टम को डेटा-आधारित और पारदर्शी बनाना है, लेकिन यह भी देखना होगा कि इससे ईमानदार करदाताओं पर अनावश्यक विवाद तो नहीं बढ़ेंगे। फिलहाल ड्राफ्ट पर सुझाव मांगे गए हैं, अंतिम नियम आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

























































