नई दिल्ली: चंद्र ग्रहण को लेकर प्राचीन समय से कई धारणाएं और मान्यताएं रही हैं. इसे सिर्फ खगोलीय घटना न मानकर, इसके आध्यात्मिक और पारिवारिक प्रभाव भी माने जाते हैं. खासकर भारतीय संस्कृति में ग्रहण के समय कुछ विशेष उपायों को अपनाने की परंपरा रही है. माना जाता है कि इन उपायों से ग्रहण के बुरे प्रभाव को कम किया जा सकता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. ग्रहण का समय ऊर्जा के उतार-चढ़ाव का होता है.
इस दौरान हमारे आसपास की नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है, जिससे मानसिक बेचैनी, पारिवारिक तनाव या स्वास्थ्य से जुड़ी हल्की समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में कुछ सरल उपाय, पूजा-पाठ और सेवा कार्यों को करने से माहौल में संतुलन बना रहता है और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है. नीचे दिए उपायों को अपनाकर आप भी अपने जीवन को थोड़ा और सहज और सुखद बना सकते हैं.
ग्रहण के दौरान करें ये कार्य
1. तुलसी पत्र का प्रयोग करें
ग्रहण के समय खाने-पीने की चीजों में तुलसी का पत्ता डालकर रखना लाभकारी होता है. यह माना जाता है कि तुलसी नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने में मदद करती है और खाद्य पदार्थ अशुद्ध नहीं होते.
2. मंत्रों का जाप करें
इस समय चंद्र देव के बीज मंत्र “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः” का जाप लाभकारी होता है. इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र या भगवान शिव और विष्णु के मंत्रों का जाप भी किया जा सकता है. मंत्रों का उच्चारण वातावरण को शांत और ऊर्जावान बनाता है.
3. ध्यान और साधना करें
ग्रहण के समय कुछ देर ध्यान करने से मन की स्थिरता बनी रहती है. साधना से आत्मबल बढ़ता है और मानसिक उलझनों से राहत मिलती है.
ग्रहण के बाद इन बातों का रखें ध्यान
1. स्नान और दान करें
ग्रहण समाप्त होते ही शुद्ध जल से स्नान करना शुभ माना जाता है. इसके बाद गरीबों को चावल, कपड़े और अन्न का दान करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. दान से मानसिक संतोष भी मिलता है.
2. नवग्रह पूजा करें
ग्रहण के बाद नवग्रह शांति का पाठ या पूजा करना उपयोगी होता है. यह जीवन में ग्रहों के नकारात्मक असर को कम करता है और शुभ फल देता है.
3. कपूर का उपयोग करें
सुबह और शाम घर में कपूर जलाकर आरती करने से वातावरण शुद्ध होता है और घर में शांति बनी रहती है. यह नकारात्मकता को दूर करने का एक प्रभावशाली तरीका माना जाता है.
4. पवित्र वस्तुओं का दान करें
चांदी, चावल या अन्य उपयोगी वस्तुएं जरूरतमंदों को दान करना ग्रहण के बाद विशेष फलदायी होता है. यह न सिर्फ पारिवारिक खुशहाली लाता है, बल्कि सामाजिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है.

























































