भुवनेश्वर: भारतीय राजनीति में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो खामोशी से तूफान की पटकथा लिखते हैं. ओडिशा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल उन्हीं में से एक हैं. 2024 के विधानसभा चुनाव में जिस नेता ने 24 साल पुराने नवीन पटनायक के शासन का अंत करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी, भाजपा ने अब उन्हें देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. यह फैसला सामल की उस अटूट निष्ठा और रणनीतिक कौशल का सम्मान माना जा रहा है, जिसने ओडिशा में पहली बार ‘कमल’ को पूर्ण बहुमत के साथ खिलाया.
कानून की समझ और राजनीति का जुनून
15 अप्रैल, 1959 को ओडिशा के भद्रक जिले में जन्मे मनमोहन सामल ने अपनी शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी करने के बाद उत्कल विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन (B.A.) और कानून (L.L.B.) की डिग्री हासिल की. बाद में उन्होंने फकीर मोहन विश्वविद्यालय से एलएलएम (LL.M) भी किया. उनके पिता का नाम स्व. कम्भुपणि सामल और माता का नाम बसंत कुमारी सामल है. शिक्षा के दौरान ही उनमें नेतृत्व के गुण दिखने लगे थे जो उन्हें आगे चलकर राज्य के शीर्ष नेताओं की कतार में ले आए.
राजनीतिक में उतार-चढ़ाव और संघर्ष की कहानी
सामल का राजनीतिक सफर तीन दशकों से अधिक लंबा है. वे 1999 से 2004 के बीच भी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे थे. 2004 में वे धमनगर सीट से विधायक चुने गए और नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली तत्कालीन गठबंधन सरकार में राजस्व और खाद्य आपूर्ति मंत्री बने. हालांकि, 2024 के चुनाव में वे खुद चांदबाली सीट से बेहद मामूली अंतर (करीब 1916 वोट) से हार गए लेकिन उनके नेतृत्व में पार्टी ने वह कर दिखाया जो अब तक असंभव माना जा रहा था.
वह रणनीति जिसने बदल दिया इतिहास
जब 2023 में मनमोहन सामल को ओडिशा का फिर से प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तब भाजपा राज्य में एक कमजोर विपक्ष मानी जा रही थी. सामल ने दो प्रमुख मोर्चों पर काम किया:-
- गठबंधन का विरोध: एक समय था जब भाजपा और बीजेडी के बीच गठबंधन की चर्चाएं जोरों पर थीं. सामल ने अकेले चुनाव लड़ने का जुआ खेला और केंद्रीय नेतृत्व को भरोसा दिलाया कि भाजपा अकेले दम पर सरकार बना सकती है.
- जमीनी संगठन: उन्होंने ‘बूथ चलो’ अभियान के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया. सुभद्रा योजना और धान के एमएसपी (3100 रुपये) जैसे वादों को घर-घर पहुंचाया की रणनीति उनकी ही थी.
- ओडिया अस्मिता: उन्होंने नवीन पटनायक के करीबी वी.के. पांडियन के प्रभाव को ‘ओडिया अस्मिता’ से जोड़कर एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया जिसने वोटरों को भावनात्मक रूप से भाजपा की ओर मोड़ा.
परिवार और व्यक्तिगत जीवन
मनमोहन सामल की पत्नी का नाम प्रणति सामल है. उनका एक बेटा और एक बेटी है. सामल को एक सादगी पसंद नेता माना जाता है जो अक्सर कार्यकर्ताओं के बीच जमीन पर बैठकर चर्चा करते देखे जाते हैं.

























































