नई दिल्ली। विपक्षी दलों ने बुधवार को कहा कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन परिसीमन विधेयक का एकजुट होकर विरोध करेंगे। विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर साझा रणनीति को लेकर चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यह बैठक अपने आवास ’10 राजाजी मार्ग’ पर अपराह्न तीन बजे बुलाई थी।
बैठक के बाद खरगे ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम सभी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में हैं, लेकिन यह जिस तरह से लाया गया है, उसको लेकर आपत्ति है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने फैसला किया है कि हम इस विधेयक (परिसीमन) का विरोध करेंगे।’
खड़गे ने कहा, ‘आज, आज हमारी विपक्षी पार्टियों के साथ एक बैठक हुई। हम सबने मिलकर कल के लिए, संसद सत्र के लिए रणनीति तय की। माननीय कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता (LOP) इस बारे में जानकारी देंगे। नहीं… मुझे और कुछ नहीं कहना है, बस मैं इतना कह सकता हूं कि हम सब ‘महिला आरक्षण बिल’ के पक्ष में हैं। लेकिन जिस तरीके से वे इसे लाए हैं, उस पर हमें कुछ आपत्तियां हैं, और यह राजनीति से प्रेरित लगता है।
विपक्षी पार्टियों को फँसाने और दबाने के लिए ही सरकार ऐसा कर रही है। इसलिए, हम सबने यह तय किया है कि हम इसका विरोध करेंगे, हालांकि हम लगातार महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते आ रहे हैं। 2010 से। और अब 2023 में भी, इस संवैधानिक संशोधन को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया है। और हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उन्हें इसे लागू करना चाहिए।’
जयराम रमेश ने कहा कि विपक्षी दल चाहते हैं कि 2029 से महिला आरक्षण लागू हो, लेकिन वे परिसीमन के प्रावधानों का पूरी तरह विरोध करेंगे। विपक्ष की बैठक से पहले, कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने इन विधेयकों को लेकर अलग से चर्चा की।
बैठक में बड़े-बड़े विपक्षी नेता रहे शामिल
बैठक में खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और जयराम रमेश, द्रमुक नेता टी. आर. बालू, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (उबाठा) के संजय राउत एवं अरविंद सावंत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले, आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह सहित अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने डिजिटल माध्यम से बैठक में भाग लिया।
कल संसद में महाघमासान के आसार
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मूर्त रूप देने के लिए बृहस्पतिवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इनसे संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है।

























































