नई दिल्ली: ऐसा कहा जाता है कि क्रिकेट के जन्म इंग्लैंड में हुआ। इंग्लैंड ने जिस भी देश को अपना उपनिवेश बनाया। वहां-वहां क्रिकेट का खेल बढ़ता चला गया। आज क्रिकेट ओलंपिक तक भी पहुंच गया है। क्रिकेट की लोकप्रियता देख हर युवा क्रिकेटर बनना चाहता है। वह किसी ना किसी को अपना आदर्श मानता है।
एक महारिकॉर्ड
क्रिकेट के हर महान खिलाड़ी की जर्नी घरेलू क्रिकेट से होकर गुजरी है। इन्हीं में से कुछ ऐसे खिलाड़ी रहे, जिन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड बनाए। इनमें से एक महान खिलाड़ी ने महारिकॉर्ड बनाया है। आप सोच रहे होंगे कि वो रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के 100 अंतरराष्ट्रीय शतक। मुथैया मुरलीधरन के 800 विकेट। ये सभी भी बड़े नंबर हैं जो शायद ही टूटें, लेकिन एक खिलाड़ी ऐसा रहा, जिसके रिकॉर्ड्स के आगे विश्व क्रिकेट के सभी आंकड़े फीके नजर आते हैं। उनका नाम था जैक हॉब्स।
घरेलू क्रिकेट में बनाया है दमदार रिकॉर्ड
इंग्लैंड के कैमब्रिज में 1882 में जन्मे जॉन बैरी हॉब्स को क्रिकेट जगत में ‘जैक हॉब्स’ के नाम से जाना गया। बेशक औसत के मामले में ऑस्ट्रेलिया के डॉन ब्रैडमैन ने टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया, लेकिन जैक हॉब्स के जमाने में उतना टेस्ट क्रिकेट हुआ नहीं और जितने साल उन्होंने टेस्ट और प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला, उतने साल जमकर रन बनाए। उन्होंने कुछ ऐसे आंकड़े खड़े किए जो प्रथम श्रेणी क्रिकेट में आज भी शीर्ष पर हैं।
बनाए हैं 61 हजार रन
जैक हॉब्स ने घरेलू क्रिकेट में 834 मैच खेले। इस दौरान 61,760 रन बनाए। उनका औसत 50.70 का रहा। जैक ने 199 शतक और 273 अर्धशतक जड़े। वह 107 बार नॉट आउट रहे। गेंदबाजी करते हुए उनके नाम 108 विकेट दर्ज हैं। जैक हॉब्स ने 342 कैच पकड़े हैं। ये एक ऐसा आंकड़ा है जिसे क्रिकेट के इतिहास में शायद ही कोई खिलाड़ी इसके पार जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छोड़ी छाप
घरेलू क्रिकेट में तो हॉब्स ने रन बनाए ही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इंग्लैंड के इस महान खिलाड़ी ने अपनी छाप छोड़ी। इंग्लैंड के लिए 1908 से 1930 तक कुल 61 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान 102 पारियों में 15 शतक की मदद से कुल 5410 रन बनाए।
मिली सर की उपाधि
वो दुनिया के पहले ऐसे क्रिकेटर बने थे जिनके नाम के साथ ‘सर’ (Knighthood) जुड़ा। उन्होंने 1934 में क्रिकेट से संन्यास लिया और उसके बाद वो पत्रकार बन गए थे। उन्होंने इंग्लैंड की टीम के साथ विदेशी दौरे पर भी सफर किया और चार किताबें भी लिखीं। उन्होंने काफी पैसा दान भी किया और इसीलिए संन्यास के बाद भी काफी समय तक चैरिटी क्रिकेट खेलते रहे।
मोची की लड़की से हुआ था प्यार
दिसंबर 1963 में जैक हॉब्स का निधन भी हो गया। जैक हॉब्स की 81 वर्ष की आयु में मृत्यु हुई। उन्होंने अपने पीछे 19 हजार 445 पाउंड छोड़े। उन्होंने एक मोची की लड़की एडा से शादी की थी, जिन पर हॉब्स का दिल आ गया था। दोनों के चार बच्चे हुए। हॉब्स की पत्नी का मार्च 1963 में निधन हुआ।

























































