नई दिल्ली। ईरान युद्ध से चीन आधुनिक युद्ध के बारे में काफी कुछ सीखने की कोशिश कर रहा है. चीन के सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, पहले ईरान के सस्ते शाहेद ड्रोन की खूब चर्चा हुई और अब उसकी सस्ती मिसाइल 358 की चर्चा हो रही है. उन्होंने सुझाव दिया कि चीन को भी ऐसे ही हथियारों के विकास पर ध्यान देना चाहिए.
358 मिसाइल ने गिराए महंगे अमेरिकी ड्रोन
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में, सरकारी मीडिया ने ईरान की ओर से डिजाइन किए गए काउंटर-ड्रोन लोइटरिंग इंटरसेप्टर यानी 358 मिसाइल की भूमिका पर गौर किया है, जिसने अमेरिका-इजरायल के ईरान पर युद्ध के दौरान कई बिना-पायलट वाले हवाई वाहनों जैसे कि MQ-9 रीपर को मार गिराया.
358 मिसाइल को SA-67 के नाम से भी जाना जाता है. इसका वजन लगभग 50 किलोग्राम है. एक माइक्रो-टर्बोजेट और सॉलिड रॉकेट बूस्टर से चलने वाली यह मिसाइल, 100-150 किलोमीटर तक लगभग Mach 0.6 की सबसोनिक गति से उड़ान भरती है. यह मिसाइल लक्ष्य को भेदने के लिए इन्फ्रारेड सीकर का इस्तेमाल करती है.
358 मिसाइल के छोटे, बिना-आफ़्टरबर्निंग वाले इंजन का इंफ्रारेड सिग्नेचर कम होता है, जिससे आधुनिक ड्रोन के हीट-सीकिंग सेंसर के लिए इस हथियार का पता लगाना मुश्किल हो जाता है. झांग ने इसकी स्टील्थ क्षमता को छिपा हुआ तीर बताया है.
क्या है सबसे बड़ी कमी
पारंपरिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की गति अक्सर Mach 3 से ज़्यादा होती है. 358 मिसाइल की अपेक्षाकृत धीमी गति Mach 0.6 एक बड़ी कमी मानी जाती है. माना जाता है कि ये जेट-चालित विमानों से मुकाबला नहीं कर सकती हैं.
पारंपरिक मिसाइलों की दसवां हिस्सा है कीमत
चीनी सैन्य टिप्पणीकार झांग ज्यूफेंग के अनुसार, इस हथियार में कुछ अनोखे फायदे भी हैं. इसका मुख्य फायदा इसकी बेहद कम कीमत है. इसके सरल टर्बोजेट इंजन की वजह से, इसकी कीमत उतनी ही रेंज और मारक क्षमता वाली पारंपरिक वायु-रक्षा मिसाइलों की कीमत का लगभग दसवां हिस्सा है.
समझें कीमत का गणित
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी वायु सेना ने 28 फरवरी से 8 अप्रैल तक, ईरान में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान 24 MQ-9 ड्रोन्स खो दिए, जिससे उसे 720 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ. इसके विपरीत, ईरानी मिसाइल 358 की कीमत प्रति यूनिट सिर्फ 30 हजार से 90 हजार अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है.
चीन तैयार है आधुनिक युद्ध के लिए
CCTV की यह रिपोर्ट ऐसे समय में प्रसारित हुई है जब रक्षा उद्योग बड़े पैमाने पर, कम लागत वाले ‘एट्रीशन वॉरफेयर’ (लंबे समय तक चलने वाले युद्ध) के बढ़ते चलन का अध्ययन कर रहा है. इससे पहले, ईरान के सस्ते ‘सुसाइड ड्रोन’ शाहेद 136 से प्रेरित होकर, चीन ने उससे भी कम कीमतों पर कई ऐसे ही ड्रोन तैयार कर लिए हैं. उदाहरण के लिए, शाहेद 136 की अनुमानित कीमत प्रति यूनिट 20,000 डॉलर है, लेकिन नोरिन्को (Norinco) के ‘फ़ेइलॉन्ग-300D’ की कीमत 10,000 डॉलर रखी गई है.

























































