नई दिल्ली। ज्येष्ठ महीना 2 मई से शुरू हो रहा है इसका समापन 29 जून 2026 को है. हिंदू कैलेंडर में हर महीना 30 दिन का होता है लेकिन इस साल हिंदू पंचांग का तीसरा महीना ज्येष्ठ 59 दिन का होगा, क्योंकि इस माह में अधिकमास का संयोग भी बन रहा है. सामान्य ज्येष्ठ के साथ एक अधिक ज्येष्ठ का महीना भी जुड़ जाएगा, जिस कारण ज्येष्ठ मास दो महीने तक रहेगा.
ज्येष्ठ माह इसलिए भी खास है क्योंकि इसी महीने शनि देव का जन्म हुआ था. श्रीराम हनुमान जी से मिले थे. सूर्य देव और वरुण देव की पूजा का विशेष महत्व है. भीषण गर्मी के बीच किए गए दान, व्रत और जप का फल कई गुना अधिक बताया गया है. इस माह की पूर्णिमा पर ज्येष्ठा नक्षत्र का योग बनने के कारण इसका नाम ज्येष्ठ माह पड़ा.
2026 में ज्येष्ठ माह 60 दिन का होगा
ज्येष्ठ माह 2 मई से शुरू होगा और 29 जून तक रहेगा. ज्येष्ठ 30 की जगह 58 दिन का होगा. इस बीच ज्येष्ठ अधिकमास 17 मई 2026 से होगी और यह 15 जून 2026 तक रहेगा.
ज्येष्ठ माह का महत्व
स्कंद पुराण में कहा गया है – “ज्येष्ठे मासि तु यत् दानं, जलदानं विशेषतः. तेन तुष्यति देवेशो, विष्णुः सर्वफलप्रदः॥”
अर्थ: ज्येष्ठ मास में विशेषकर जल का दान करने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.
पद्म पुराण “ज्येष्ठे स्नानं विशेषेण, सर्वपापप्रणाशनम्.”
अर्थ: ज्येष्ठ मास में किया गया पवित्र स्नान सभी पापों का नाश करने वाला माना गया है.
भविष्य पुराण –उपवासैः तपोभिश्च, ज्येष्ठे मासि विशेषतः. लभते मानवो नित्यं, पुण्यं मोक्षप्रदायकम्॥”
अर्थ: इस महीने में व्रत और तप करने से मनुष्य को मोक्ष प्रदान करने वाला पुण्य प्राप्त होता है.
ज्येष्ठ माह के नियम
- इस महीने में एक समय भोजन करना श्रेष्ठ माना गया है. महाभारत अनुशासन पर्व में इसका उल्लेख मिलता है, जिससे शरीर निरोगी रहता है.
- दिन में सोने से बचना चाहिए. यदि स्वास्थ्य कारणों से आवश्यकता हो तो विश्राम किया जा सकता है.
- प्रतिदिन सूर्योदय से पहले स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है.
- पेड़-पौधों को पानी देना, पक्षियों और पशुओं की सेवा करना भी इस महीने का प्रमुख धर्म है.
- इस माह में जल दान का विशेष महत्व है, जैसे प्यासे लोगों को पानी पिलाना या प्याऊ लगवाना. घड़ा या सुराही दान करना चाहिए.
ज्येष्ठ माह में न करें ये काम
- ज्येष्ठ माह में गर्मी चरम पर रहती है, ऐसे में पानी की बर्बादी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे वरुण दोष लगने की मान्यता है.
- आयुर्वेद के अनुसार इस समय शरीर में गर्मी और वात बढ़ता है, इसलिए वात बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए.
- ज्यादा मसालेदार और गरिष्ठ भोजन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए सादा भोजन अपनाएं.
- इस महीने बैंगन का सेवन वर्जित माना गया है, इसे संतान के लिए अशुभ बताया गया है.
- ज्येष्ठ मास में बाल कटवाना और नाखून काटना भी वर्जित माना गया है.
- लहसुन और राई जैसे तीखे पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए.
- मांसाहार और मदिरा का सेवन करने से बचना चाहिए, ताकि मन और शरीर शुद्ध बना रहे.

























































