चेन्नई : तमिलनाडु की राजनीति में दशकों से चले आ रहे ‘ब्राह्मण विरोध’ के नैरेटिव को सुपरस्टार थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। अपने पहले ही चुनावी समर में विजय ने न केवल जादुई आंकड़ा छूते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, बल्कि राज्य की राजनीति के बुनियादी समीकरणों को भी बदल दिया है।

इस चुनाव का सबसे बड़ा विश्लेषण यह है कि जहाँ DMK, AIADMK और यहाँ तक कि BJP जैसी बड़ी पार्टियों ने भी इस बार एक भी ब्राह्मण उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया, वहीं विजय ने समावेशी राजनीति का साहसिक परिचय देते हुए ब्राह्मण समुदाय पर भरोसा जताया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि TVK की इस जीत के पीछे उनके रणनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर का दिमाग है, जो स्वयं ब्राह्मण हैं और उन्होंने ‘अकेले चलो’ की रणनीति के साथ राज्य के हर वर्ग को साथ जोड़ने का मास्टरप्लान तैयार किया।
बाकि बड़ी पार्टियों द्वारा ब्राह्मणों को टिकट न देने के पीछे की वजह दशकों पुरानी द्रविड़ राजनीति की वह विचारधारा रही है, जिसका आधार ही गैर-ब्राह्मणवाद पर टिका है। DMK और AIADMK जैसी पार्टियों को डर था कि ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने से उनका पारंपरिक ‘ओबीसी और दलित’ वोट बैंक छिटक सकता है। यहाँ तक कि खुद को हिंदुत्व की रक्षक बताने वाली बीजेपी ने भी चुनावी अंकगणित के डर से इस समुदाय से दूरी बनाए रखी। इन दलों ने ब्राह्मणों को केवल एक सूक्ष्म अल्पसंख्यक मानकर हाशिए पर धकेल दिया था।
नतीजों ने यह साबित कर दिया कि जिन दलों ने केवल विरोध और बहिष्कार की राजनीति की, उन्हें जनता ने सिरे से नकार दिया। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ ब्राह्मणों और शहरी मध्यम वर्ग का प्रभाव है, वहां TVK के ब्राह्मण उम्मीदवारों ने बड़ी जीत दर्ज की। थलपति विजय ने यह दिखा दिया कि तमिलनाडु का युवा अब पुरानी नफरत वाली राजनीति से ऊब चुका है और वह ऐसी सरकार चाहता है जहाँ ‘योग्यता’ को जाति से ऊपर रखा जाए।
इस जीत के साथ ही तमिलनाडु अब एक नए युग में प्रवेश कर रहा है जहाँ किसी भी समुदाय को केवल उसकी जनसंख्या के आधार पर बहिष्कृत नहीं किया जा सकेगा। थलपति विजय और प्रशांत किशोर की इस जोड़ी ने भारतीय राजनीति के सबसे कठिन माने जाने वाले राज्य में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की एक नई और सफल इबारत लिख दी है। विजय अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में एक ऐसी सरकार की नींव रखने जा रहे हैं, जो सबके लिए समान अवसर का दावा करती है।

























































