नई दिल्ली : क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील का असर भारतीयों की फॉरेन ट्रिप्स पर दिखने लगा है? भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़े कुछ ऐसे ही संकेत दे रहे हैं. विदेश यात्रा पर भारतीयों का खर्च लगातार घट रहा है और मार्च 2026 में यह कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई के पहले पखवाड़े में देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की थी. उन्होंने लोगों से गैर जरूरी आयात, सोने की खरीद और विदेशी यात्राओं में संयम बरतने की बात कही थी, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत बना रहे. दिलचस्प बात यह है कि आरबीआई के आंकड़े दिखाते हैं कि भारतीयों ने पीएम मोदी की अपील से पहले ही विदेश यात्रा पर खर्च कम करना शुरू कर दिया था.
आरबीआई के मुताबिक, मार्च 2026 में भारतीयों ने विदेश यात्रा पर सिर्फ 1.09 अरब डॉलर खर्च किए. फरवरी में यह आंकड़ा 1.30 अरब डॉलर था, जबकि जनवरी में विदेश यात्रा पर खर्च 1.65 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. यानी सिर्फ दो महीनों में विदेश यात्रा पर खर्च करीब 56 करोड़ डॉलर घट गया. यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब पश्चिम एशिया तनाव, महंगा डॉलर, बढ़ते एयरफेयर और वैश्विक अनिश्चितता ने विदेशी ट्रैवल को पहले से ज्यादा महंगा बना दिया है.
आरबीआई के लिब्रलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम यानी एलआरएस डेटा के मुताबिक, ‘अन्य यात्रा’ श्रेणी में मार्च के दौरान 62.30 करोड़ डॉलर खर्च किए गए. इसमें छुट्टियां, इंटरनेशनल होटल बुकिंग और विदेशी क्रेडिट कार्ड खर्च शामिल हैं. यह कुल यात्रा खर्च का करीब 57 प्रतिशत हिस्सा रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी ट्रिप्स पर घटती बुकिंग और नियंत्रित खर्च का असर इस डेटा में साफ दिख रहा है.
विदेश पढ़ाई और प्रॉपर्टी खरीद भी धीमी
विदेश में पढ़ाई से जुड़े खर्च में भी नरमी देखने को मिली. मार्च में ‘विदेश में अध्ययन’ श्रेणी के तहत खर्च घटकर 15.17 करोड़ डॉलर रह गया. जनवरी में यही आंकड़ा 26.74 करोड़ डॉलर था. विदेश में प्रॉपर्टी खरीद पर भारतीयों का खर्च भी घटा है. मार्च में सिर्फ 3.86 करोड़ डॉलर विदेश में अचल संपत्ति खरीद पर खर्च किए गए, जबकि फरवरी में यह 5.13 करोड़ डॉलर था.
आखिर क्यों कम हो रही हैं फॉरेन ट्रिप्स
विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई वजहें हैं. पहली वजह पश्चिम एशिया तनाव और वैश्विक अनिश्चितता है, जिससे लोग महंगी विदेशी यात्राओं से बच रहे हैं. दूसरी वजह डॉलर की मजबूती है. रुपये की कमजोरी के कारण विदेश यात्रा पहले के मुकाबले काफी महंगी हो गई है. तीसरी वजह सरकार का विदेशी मुद्रा बचाने पर बढ़ता फोकस है. सरकार लगातार लोकल खर्च, घरेलू पर्यटन और आयात पर निर्भरता घटाने पर जोर दे रही है.
क्या है एलआरएस योजना
आरबीआई की एलआरएस योजना के तहत भारत का कोई भी निवासी एक वित्त वर्ष में 2.50 लाख डॉलर तक विदेश भेज सकता है. यह रकम यात्रा, पढ़ाई, निवेश, प्रॉपर्टी खरीद या अन्य वैध खर्चों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है. मार्च 2026 में एलआरएस के तहत कुल 2.59 अरब डॉलर विदेश भेजे गए, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा यात्रा खर्च का था.
विदेशी मुद्रा बचाने पर सरकार का जोर
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है. ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखना सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में वैश्विक तनाव और महंगा डॉलर बना रहता है, तो भारतीयों की विदेशी यात्राओं और बाहरी खर्च में और कमी देखने को मिल सकती है.

























































