भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में रैगिंग रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।उच्च शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को एंटी-रैगिंग व्यवस्था मजबूत करने को कहा है।
विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कैंपस और छात्रावासों में चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए।इसके लिए एंटी-रैगिंग स्क्वॉड, कमेटी और मॉनिटरिंग सेल का गठन या पुनर्गठन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। साथ ही औचक निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट सुरक्षित रखने को भी कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी सख्ती
यह निर्देश 25 अगस्त 2025 को आयोजित एनएचआरसी की ओपन हाउस चर्चा के बाद जारी किया गया है।चर्चा का विषय था— “उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की पुनर्समीक्षा: जागरूकता, जवाबदेही और कार्रवाई के माध्यम से सुरक्षित परिसर निर्माण।”
आयोग ने “सुकदेब साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य” मामले में सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2025 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए संस्थानों को अधिक जिम्मेदारी निभानी होगी।
हॉस्टल और संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर
उच्च शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि एंटी-रैगिंग स्क्वॉड हॉस्टल और कैंपस के संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखे। ड्यूटी रोस्टर तैयार करने और नियमित व अचानक जांच करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा एंटी-रैगिंग समितियों में एससी और एसटी समुदायों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसकी पुष्टि संस्थान प्रमुख को करनी होगी।
शिकायतों के लिए तीन-स्तरीय व्यवस्था
रैगिंग से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए तीन-स्तरीय तंत्र बनाया जाएगा। इसमें संस्थागत सेल, मॉनिटरिंग एजेंसी और जरूरत पड़ने पर जिला स्तरीय समिति शामिल होगी।
सरकार ने यह भी कहा है कि शिकायत बंद करने से पहले पीड़ित छात्र से फीडबैक लेने की कोशिश की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मामला संतोषजनक ढंग से सुलझा है।
नए छात्रों के लिए जागरूकता अभियान
सभी संस्थानों को फ्रेशर्स के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम, जागरूकता अभियान और एंटी-रैगिंग संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही छात्रों के लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
उच्च शिक्षा विभाग ने साफ किया कि सभी संस्थानों को यूजीसी के 2009 के एंटी-रैगिंग नियमों और समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा।

























































