नई दिल्ली। भारत में 5G नेटवर्क स्लाइसिंग और नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर TRAI और जियो आमने-सामने हैं। दरअसल TRAI 5G नेटवर्क स्लाइसिंग को लेकर कुछ पाबंदियां लगाने का प्रस्ताव रखा है। Jio की मांग है कि इसे पूरी तरह से वापस ले लिया जाए।
इस मामले की जड़ में दो नियम हैं, जो कि TRAI लाना चाहती है। पहला ये कि अगर किसी इलाके में 5G नेटवर्क पर 80% लोड पड़ जाए, तो कंपनियों पर पाबंदियां लगें और बिना जानकारी के नया VIP नेटवर्क या नेटवर्क स्लाइसिंग न की जाए। इन्हें लेकर Jio को कड़ी आपत्ति है।
BIF ने उठाया लोगों का पक्ष
इस पूरी जद्दोजहद के बीच BIF यानी कि ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम ने आम यूजर्स का पक्ष उठाया है। उनका कहना है कि कंपनियां ज्यादा पैसा लेकर चुनिंदा ऐप्स को ज्यादा स्पीड दे सकती हैं। इससे आम लोगों के लिए इंटरनेट स्लो हो सकता है और नेट न्यूट्रैलिटी खत्म हो सकती है।
BIF का मत है कि कंपनियां नई तकनीक लाएं लेकिन इससे आम यूजर के इंटरनेट एक्ससे करने के अधिकार का हनन नहीं होना चाहिए।(REF.)
Jio की परेशानी क्या है?
TRAI का कहना है कि जैसे ही टावर 80% क्षमता पर इस्तेमाल करने लगे, तो कंपनियों को या तो नेटवर्क की क्षमता बढ़ानी चाहिए या फिर यूजर्स को नेटवर्क जाम का अलर्ट भेजना चाहिए।
इस पर Jio का मत है कि यह पैमाना ही पूरी तरह से गलत है। Jio का कहना है कि सिर्फ डेटा लोड देखकर तय नहीं किया जा सकता है कि यूजर को अच्छी स्पीड मिल रही है या नहीं। Jio ने इसे जबरन शर्त बताया है।
Jio का तर्क लोड ज्यादा फिर भी स्पीड मिलेगी डबल
- Jio ने अपने लैब और फील्ड टेस्ट के हवाले से कहा है कि आज का 5G नेटवर्क पुरानी तकनीक से बिल्कुल अलग है। आज की 5G तकनीक में ऐसे एंटीना लगे हैं जो
- एक ही समय पर ज्यादा से ज्यादा लोगों को तेज स्पीड इंटरनेट दे सकते हैं। Jio का दावा है कि लोड ज्यादा होने पर भी इस तकनीक की मदद से स्पीड 200% से ज्यादा बढ़ सकती है।
- ऐसे में कंपनियों से जबरदस्ती नए टावर लगवाने से न सिर्फ खर्च बढ़ेगा बल्कि लोगों में नेटवर्क जाम का झूठ भी फैलेगा।
नेटवर्क स्लाइसिंग पर मंजूरी नहीं लेना चाहते Airtel-Jio
इसके अलावा TRAI ये भी चाहता है कि नया 5G नेटवर्क शुरू करने से पहले यानी कि 5G स्लाइसिंग से पहले सरकार को नोटिस जिया जाए। इस पर एयरटेल और जियो दोनों ही खफा हैं। Jio चाहता है कि यह नियम होना ही नहीं चाहिए।
वहीं Airtel का कहना है कि 21 दिन पहले नोटिस देने के चक्कर में कंपनियों, अस्पतालों या इमरजेंसी जैसी जरूरी सेवाओं के लिए तेजी से स्पेशल नेटवर्क शुरू करने में भारी देरी होगी।





















































