नई दिल्ली। सुबह उठते ही सीने में दर्द, भारीपन या जकड़न महसूस हो तो इसे हमेशा गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर अगर किसी व्यक्ति को पहले से हार्ट डिजीज, हाई बीपी, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं हैं, तो असामान्य रूप से सीने में दर्द को गंभीरता से लेना जरूरी है।
कुछ रिसर्च में हार्ट अटैक यानी एक्यूट मयोकार्डियक इंफ्रेकशन के लक्षणों की शुरुआत सुबह के घंटों में अपेक्षाकृत अधिक देखी गई है। हालांकि, सुबह होने वाला सीने का दर्द हर बार हार्ट अटैक का संकेत ही नहीं होता और कई नॉर्मल केसज में इसकी वजह एसिडिटी, गैस या मांसपेशियों की समस्या भी हो सकती है। फिर भी अगर व्यक्ति को दर्द के साथ सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर, कमजोरी या हाथ का दर्द, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना जैसे संकेत दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
सुबह उठते समय सीने में दर्द क्यों चिंता का कारण हो सकता है?
नींद के दौरान शरीर आराम की अवस्था में होता है। लेकिन जागने और उठने के आसपास शरीर में कई शारीरिक बदलाव शुरू होते हैं। हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम और ब्लड वैसल्स की गतिविधि बदलती है। अचानक उठने और सक्रिय होने पर शरीर की मांग भी बढ़ती है। एनसीबीआई के अनुसार कई स्टडी में पाया गया है कि एक्यूट मयोकार्डियक इंफ्रेकशन (Acute Myocardial Infarction) के लक्षणों की शुरुआत सुबह के समय अधिक हो सकती है। एक बड़े ISAM अध्ययन में 1,741 हार्ट अटैक मरीजों में सुबह 6 बजे से दोपहर के बीच घटनाओं की संख्या अधिक पाई गई।
एनसीबीआई के अनुसार एक भारतीय स्टडी में भी 200 Acute Myocardial Infarction मरीजों में सबसे ज्यादा मामलों की शुरुआत सुबह 4 बजे से 10 बजे के बीच देखी गई थी। हालांकि, यह स्टडी काफी समय पहले हुई थी और इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर व्यक्ति में सुबह हार्ट अटैक का खतरा समान रूप से बढ़ता है।
क्या सुबह हार्ट अटैक का जोखिम ज्यादा हो सकता है?
कई स्टडी ने हार्ट अटैक की शुरुआत में सर्काडियन वैरिएशन यानी दिन के अलग-अलग समय के अनुसार बदलाव देखा है। एनसीबीआई के अनुसार स्प्रिंट स्टडी में भी मयोकार्डियक इंफ्रेकशन के लक्षणों की शुरुआत को सुबह के समय अधिक देखा गया था। जिसमें शोधकर्ताओं ने इसके पीछे सुबह के समय होने वाले शरीर के आंतरिक बदलावों की संभावित भूमिका बताई।
इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। एनसीबीआई के अनुसार सुबह जागने के आसपास स्मपेथिटिक नर्वस सिस्टम की सक्रियता बढ़ती है, शरीर की गतिविधि बढ़ती है और ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में बदलाव आते हैं। कुछ रिसर्च में सुबह के समय प्लेटलेट्स एग्रीगेशन बढ़ने को भी हार्ट अटैक को सर्काडियन पैटर्न से जोड़ा गया है।
नींद के दौरान ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में क्या बदलाव होते हैं?
एनसीबीआई के अनुसार सामान्य नींद के दौरान शरीर का ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट आमतौर पर जागने की तुलना में कम हो जाता है। खासकर Non-REM Sleep (सोने का एक चरण) के दौरान पैरास्मपैथिटिक ए्क्टिविटी बढ़ने और स्मपैथिटिक ए्क्टिविटी घटने से कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम अपेक्षाकृत आराम की स्थिति में रहता है।
लेकिन सुबह जागने के करीब शरीर धीरे-धीरे सक्रिय चरण (Active State) में जाने लगता है। हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, और ऑटोनोमिक एक्टिविटी में बदलाव आने लगते हैं। यही सर्काडियन बदलाव उन लोगों में महत्वपूर्ण हो सकते हैं, जिनकी कोरोनरी आर्टरीज पहले से प्रभावित हैं।
हार्ट से संबंधित सीने में दर्द और एसिडिटी व गैस से सीने में दर्द कैसे अंतर करें?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अन्य सोर्स के अनुसार सीने में दर्द और जलन एसिडिटी और हार्ट अटैक दोनों में ही महसूस हो सकता है। ऐसे में आपको आगे इन दोनों में कुछ अंतर बताया गया है।
ये केवल सामान्य संकेत हैं, निश्चित जांच नहीं। सीने में जलन और हार्ट से संबंधित सीने में दर्द को एक-दूसरे से भ्रमित किया जा सकता है। अगर यह स्पष्ट नहीं है कि दर्द हार्ट से जुड़ा है या एसिडिटी से तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सपंर्क करें।
सुबह उठते समय सीने में दर्द कई कारणों से हो सकता है और हर बार यह हार्ट अटैक नहीं होता। लेकिन सुबह के समय में कई शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। अगर सुबह के समय असामान्य रूप से सीने का दर्द, खासकर दबाव/जकड़न, सांस फूलने, ठंडे पसीने, चक्कर या हाथ-जवड़े तक दर्द के साथ हो, तो इसे केवल गैस समझकर नजरअंदाज न करें। अगर आपको हार्ट अटैक या गैस की समस्या के बीच अंतर करने में परेशानी हो रही है तो ऐसे में डॉक्टर से संपर्क करना ही सही विकल्प हो सकता है।





















































