नई दिल्ली। तेजी से बदलते वक्त के साथ ही अपराधी अब अपने अपराध करने का तरीका भी बदल रहे हैं। देश में अब ऐसे अपराधी तेजी से बढ़ रहे हैं, जो एक कमरे में बैठ कर दूसरों की जिंदगी भर की कमाई पर डाका डाल रहे हैं। हाल ही में एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें देश में हो रहे साइबर क्राइम को लेकर काफी हैरान कर देने वाले खुलाए हुए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में साइबर अपराध के शिकार होने वाले लोगों में बड़ी संख्या पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल लोगों की है और साइबर क्रिमिनल्स ऐसे लोगों को निशाना बना रहे हैं।
साइबर क्राइम को लेकर हुई स्टडी
IIT मद्रास की एक स्टडी में सामने आया है कि भारत में साइबर क्रिमिनल्स के शिकार होने वाले लोगों में बड़ी संख्या पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल लोगों की है। स्टडी के मुताबिक, डिजिटल जानकारी ज्यादा होने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति साइबर फ्रॉड से पूरी तरह सुरक्षित है। साइबर अपराध के शिकार लोगों में आईटी प्रोफेशनल, बैंक कर्मचारी, डॉक्टर, मैनेजमेंट और फाइनेंस से जुड़े लोग, सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारी और साइबर सुरक्षा से जुड़े सर्टिफिकेट रखने वाले लोग भी शामिल हैं।
बता दें कि, भारत में तेजी से बढ़ती डिजिटल व्यवस्था, लगभग हर व्यक्ति तक मोबाइल की पहुंच, यूपीआई और डिजिटल इंडिया के विस्तार ने पिछले एक दशक में करोड़ों लोगों को डिजिटल फाइनेंशियल सर्विस से जोड़ा है। IIT मद्रास की स्टडी में इस बात का भी जिक्र है कि, साइबर अपराधी लोगों को किस तरह और किन परिस्थितियों में निशाना बनाते हैं।
इन लोगों को निशाना बना रहे हैं अपराधी
स्टडी में पाया गया कि कई बार लोगों को उस समय निशाना बनाया गया, जब वे तनाव या जीवन में किसी मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। इनमें परिवार में किसी की बीमारी, रिटायरमेंट, नौकरी की तलाश या काम से जुड़ा दबाव जैसी परिस्थितियां शामिल थीं। साइबर ठगी करने वालों ने लोगों के डर, पैसे कमाने की उम्मीद और अपनी छवि खराब होने की चिंता का फायदा उठाया। स्टडी के मुताबिक, ठग ऐसी स्थिति पैदा करते थे जिसमें पीड़ित ठीक से सोच नहीं पाते थे।
कई पीड़ितों ने इसे ‘माइंड अरेस्ट’ जैसी स्थिति बताया, जिसमें उन्हें सही फैसला लेने में परेशानी हुई। इस दौरान लोगों को कुछ हजार रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा तक का आर्थिक नुकसान हुआ। इसके अलावा, कई पीड़ितों ने शर्मिंदगी, नींद की समस्या, तनाव और परिवार के भरोसे में कमी जैसी परेशानियों की भी बात कही। बता दें कि, यह स्टडी चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, नई दिल्ली और मुंबई के 33 साइबर फ्रॉड पीड़ितों से बातचीत के आधार पर की गई।





















































