नई दिल्ली। बच्चे फेसबुक-इंस्टा खूब चलाते हैं. इससे उनके ऊपर कई तरह के निगेटिव प्रभाव पड़ते हैं. इसे लेकर अब कई देशों में कानून बन गया है. भारत में इस पर चिंता जताई जा रही है. अब बच्चों के सोशल मीडिया यूज को लेकर सरकार के पाले में गेंद है. इस बीच खबर है कि बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर सरकार बहुत सख्त है. केंद्र सरकार 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदियां लगाने की योजना बना रही है.
सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर आईटी इंटरमीडियरी रूल्स में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. सरकार जल्द ही नियमों में संशोधन का प्रस्ताव ला सकती है. सूत्रों के मुताबिक, नए प्रावधानों के तहत नाबालिगों के सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर सख्त नियम बनाए जा सकते हैं. सरकार की ओर से माइनर अकाउंट्स पर पाबंदियां लगाने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने भी नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी में कहा गया कि नाबालिगों को सोशल मीडिया अकाउंट नहीं खोलना चाहिए. अब सरकार भी नाबालिगों की सोशल मीडिया तक पहुंच को नियंत्रित करने के लिए आईटी नियमों में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है. हालांकि, प्रस्तावित नियमों का अंतिम स्वरूप और इन्हें लागू करने की व्यवस्था संशोधन के बाद ही स्पष्ट होगी.
सुप्रीम कोर्ट में दिखी थी चिंता
बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी सोमवार को चिंतित दिखा. फेसबुक-इंस्टा पर एंट्री और फर्जी जन्मतिथि के सहारे अकाउंट बनाने के खेल पर सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने गंभीर चिंता जताई. सुनवाई के दौरान जैसे ही कोर्ट ने यह मामला उठाया कि डिजिटल टर्म्स ऑफ सर्विस एक कानूनी अनुबंध है, जिसे भारतीय कानून के तहत नाबालिग साइन नहीं कर सकते, वैसे ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तुरंत सहमति जताते हुए कहा कि इस पर कुछ किया जाना चाहिए और यह होकर रहेगा. केंद्र सरकार इसे महज एक गाइडलाइन की बजाय आईटी नियमों के तहत सख्त कानूनी जामा पहनाने की तैयारी में है, जिससे टेक कंपनियों की मनमानी पर लगाम कसना तय माना जा रहा है.
क्या है कोर्ट की चिंता?
सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच एक एनजीओ जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए मजबूत फायरवॉल और कड़े नियम बनाने की मांग की गई है. सुनवाई के दौरान जस्टिस जोयमाल्या बागची ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि सोशल मीडिया अकाउंट खोलते समय यूजर्स को डिजिटल टर्म्स ऑफ सर्विस से सहमति देनी होती है, जो एक कानूनी अनुबंध की तरह काम करता है. भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 11 के तहत नाबालिग (जैसे 12 या 15 साल के बच्चे) अनुबंध नहीं कर सकते, और ऐसे अनुबंध शुरुआत से ही अमान्य होते हैं.
सिर्फ गाइडलाइंस नहीं, कड़े कानून की जरूरत
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट की इस बात से सहमति जताई कि यह एक शून्य यानी अमान्य अनुबंध है और इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए जाने चाहिए. कोर्ट का साफ कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियम केवल कागजी निर्देश या गाइडलाइंस बनकर नहीं रह जाने चाहिए, बल्कि सरकार को इन्हें आईटी नियमों के तहत कानूनी और वैधानिक रूप देना चाहिए. इस याचिका में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ-साथ कानून और न्याय मंत्रालय को भी प्रतिवादी बनाया गया है.
बच्चों के सामने मंडराते खतरे
याचिका में इस बात पर गंभीर चिंता जताई गई है कि बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय किन खतरनाक चीज़ों का शिकार हो रहे हैं. इनमें ऑनलाइन ग्रूमिंग, सेक्सटॉर्शन, साइबरबुलिंग, यौन शोषण और उनके निजी डेटा का दुरुपयोग जैसी गंभीर समस्याएं शामिल हैं. याचिका में यह भी उजागर किया गया है कि फेसबुक और स्नैपचैट जैसे कई बड़े प्लेटफॉर्म्स सिर्फ बच्चों द्वारा खुद से चुनी गई जन्मतिथि के आधार पर 13 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने की छूट दे रहे हैं, जो भारतीय नियमों के खिलाफ है. भारत में 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को कानूनन नाबालिग माना जाता है.
क्या इंटरनेट पर पूरी तरह बैन चाहते हैं?
याचिका में यह स्पष्ट किया गया है कि उनका मकसद बच्चों की इंटरनेट तक पहुंच पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं है. बल्कि वे ऐसे सुरक्षा उपाय चाहते हैं जहां बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता या अभिभावक की सहमति लेनी पड़े. साथ ही, बच्चों को स्वतंत्र रूप से अकाउंट बनाने से रोकने के लिए ऑटोमेटेड टेक्निकल फायरवॉल के इस्तेमाल की मांग भी की गई है. अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है और देखना यह होगा कि बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी के लिए सरकार क्या नए कड़े कदम उठाती है.





















































