नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि इस बार 11 अक्टूबर से प्रारंभ हो चुके हैं.नवरात्रि में मां दुर्गा के नव रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दौरान कन्या पूजन का बहुत अधिक महत्व होता है. ऐसा माना जाता है कि छोटी-छोटी कन्याएं मां दुर्गा का ही स्वरूप होती हैं. उनका पूजन करने से माता रानी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.
उपवास रखने वाले भक्तजन अष्टमी या नवमी के दिन बहुत ही श्रद्धा भाव से कन्याओं को अपने घर आमंत्रित करते हैं. मान्यता है कि कन्याओं का स्वागत करके उन्हें भोजन कराने से व्रत पूरी तरह सफल माना जाता है. ऐसे में दिल्ली, नोएडा जैसे हाई राइज बिल्डिंग में रहने वाले लोग खासतौर पर इस बात को लेकर दुविधा में रहते हैं कि पूजन के लिए कितनी कन्याओं को बुलाना चाहिए. क्या कम कन्या बुलाई तो उनका व्रत पूरा नहीं होगा . ऐसे में आइए जानते हैं कि इस स्थिति में शास्त्रों का क्या निर्देश है और पूजा को विधि-विधान से कैसे पूरा किया जा सकता है.
कन्याओं की संख्या और लांगुर बैठाने का नियम
जैसा कि शास्त्रों में कहा गया है कि मां दुर्गा के नव शक्ति रूप हैं, इसी कारण नौ कन्याओं को उनका स्वरूप मानकर पूजा जाता है. इन नौ कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी मां का बटुक भैरव या लांगुर मानकर पूजा जाता है. बटुक भैरव के बिना कन्या पूजन अधूरा माना जाता है. अब सवाल यह उठता है कि अगर किसी कारणवश नौ कन्याएं न मिल पाएं तो क्या करें? ऐसे समय में दिल्ली, नोएडा या किसी भी जगह रहने वाले लोगों को इस बात को लेकर परेशान होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है. अगर आपको नौ कन्याएं नहीं मिल पाती हैं, तो आप अपनी सुविधा के अनुसार कम कन्याओं से भी पूजन कर सकते हैं. इससे भी आपको पूजा का पूरा फल मिलता है और माता रानी प्रसन्न होती हैं.
घर पर कन्या पूजन करने की सही और विधि-विधान प्रक्रिया
कन्या पूजन करने की विधि बहुत ही सरल और पावन होती है. सबसे पहले कन्याओं को आदर और सम्मान सहित आसन पर बिठाएं. इसके बाद उनके चरण धोकर, माथे पर तिलक लगाएं और हाथ पर मौली बांधें. इसके बाद उन्हें हलवा, चने, पूरी और सब्जी का भोजन कराएं. भोजन कराने के बाद उनके चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें. यदि आपका सामर्थ्य हो तो उन्हें अपनी श्रद्धा अनुसार कोई सुंदर उपहार भी दे सकते हैं. इस प्रकार सच्चे मन से किया गया पूजन घर में खुशहाली लाता है. नियमपूर्वक पूजन करने से परिवार पर माता रानी की कृपा सदैव बनी रहती है. यह परंपरा बहुत ही मंगलकारी मानी जाती है, जिससे जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
दिल्ली-नोएडा की हाईराइज सोसायटी में रहने वाले लोग क्या करें?
नवरात्रि में कन्या पूजन के दौरान यदि किसी कारणवश नौ कन्याएं न मिल पाएं, तो चिंता करने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है. मां दुर्गा भाव की भूखी होती हैं, इसलिए आप अपनी सुविधा के अनुसार विषम संख्या में कन्याओं को आमंत्रित कर सकते हैं.आप एक, तीन, पांच या सात कन्याओं का भी पूजन करके व्रत का पूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं. यदि आपको केवल एक ही कन्या मिलती है, तो उसे मां दुर्गा का पूर्ण स्वरूप मानकर पूरे आदर-सत्कार के साथ भोजन कराएं और तिलक लगाकर आशीर्वाद लें.
वहीं तीन, पांच या सात की संख्या में कन्याएं मिलने पर भी विधि-विधान से उनके चरण धोकर, मौली बांधकर और हलवा-पूछी का भोग लगाकर पूजन संपन्न किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में शास्त्रीय नियम यह भी है कि आप कुल नौ थालियों में भोजन परोसें और उपस्थित कन्याओं को जिमाने के बाद, शेष बची हुई थालियों के भोजन को किसी देवी मंदिर में अर्पित कर दें, गौ माता को खिला दें या किसी जरूरतमंद तक पहुंचा दें. इसके साथ ही एक छोटे बालक को लांगुर के रूप में पूजना न भूलें. माना गया है कि सच्चे मन और निष्ठा से किया गया छोटा सा प्रयास भी माता रानी को प्रसन्न करता है.






















































