नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर जारी राष्ट्रव्यापी राजनीतिक घमासान के बीच चुनाव आयोग ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को एक बड़ा निर्देश जारी किया है। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि पंजाब, उत्तर प्रदेश और मणिपुर जैसे चुनावी राज्यों सहित 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) की मतदाता सूचियों का स्पेशल समरी रिवीजन कराया जाएगा।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ‘INDIA’ ब्लॉक के नेता दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने विचाराधीन है।
‘मशीन रीडेबल’ डिजिटल वोटर लिस्ट और कांग्रेस का दावा
गुरुवार को जारी ECI के निर्देश में कहा गया है कि निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) ड्राफ्ट और फाइनल वोटर लिस्ट के प्रकाशन के तुरंत बाद मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मुफ्त में “रीडेबल PDF फॉर्मेट” में सॉफ्ट कॉपी प्रदान करेंगे।
कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चुनाव आयोग के इस फैसले को अपनी बड़ी नैतिक और रणनीतिक जीत बताया।
पार्ट ने लिखा, “राहुल गांधी जी लंबे समय से ‘मशीन रीडेबल’ डिजिटल वोटर लिस्ट की मांग कर रहे थे ताकि मतदाता सूची में की जा रही धांधली और फर्जी नामों को पकड़ा जा सके। चुनाव आयोग जो पहले इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं था, उसे आखिरकार विपक्ष के आगे झुकना पड़ा है।”
‘मशीन रीडेबल’PDF क्या है और यह क्यों अहम है?
वर्तमान में चुनाव आयोग जो लिस्ट देता है, वह “इमेज PDF” (स्कैन की गई तस्वीरें) होती है। उसमें किसी वोटर का नाम, EPIC नंबर या डुप्लीकेट एंट्री ढूंढने के लिए कंप्यूटर प्रोग्राम या सर्च कमांड काम नहीं करता; पूरा काम मैन्युअल करना पड़ता है यानी एक-एक एंट्री खुद से चेक करनी पड़ती है।
जबकि ‘मशीन रीडेबल’ या ‘टेक्स्ट मोड’ PDF होने पर कोई भी कंप्यूटर प्रोग्राम कुछ ही मिनटों में पूरी विधानसभा के लाखों वोटों को एनालाइज कर डुप्लीकेट वोट, फर्जी पते और गलत नाम डिलीट होने के पैटर्न को तुरंत पकड़ सकता है।
कांग्रेस के अनुसार, बैंगलोर सेंट्रल के केवल एक विधानसभा क्षेत्र की स्कैन की गई लिस्ट को मैन्युअल रूप से जांचने में उनकी टीम को 6 महीने और हजारों घंटे लगे थे। मशीन-रीडेबल लिस्ट से यह काम पारदर्शी और तुरंत हो जाता है।
सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग का रुख (2018 बनाम 2026)
यह पहला मौका नहीं है जब मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के सामने आया है।
2018 का कमलनाथ और सचिन पायलट मामला: 2018 में कांग्रेस नेता कमलनाथ और सचिन पायलट ‘टेक्स्ट मोड’ ड्राफ्ट लिस्ट की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। तब सुप्रीम कोर्ट (जस्टिस ए. के. सीकरी और अशोक भूषण की पीठ) ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि चुनाव नियमावली में ‘सर्च योग्य PDF’ देना अनिवार्य नहीं है और ECI मतदाता की प्राइवेसी का हवाला देकर इमेज PDF दे सकता है।
2025-26 में ADR की याचिका और प्राइवेसी की चिंता: 2025 में जब ADR ने SIR प्रक्रिया के खिलाफ 2003 की मशीन-रीडेबल लिस्ट मांगी, तो सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने डेटा माइनिंग और नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा और निजता को लेकर चिंता जताई थी।





















































