नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का पर्व बहुत बड़ा और विशेष स्थान रखता है, जिसे कोजागरी पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है. इस साल शरद पूर्णिमा यानी कोजागरी पूर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस पावन पर्व से जुड़ी तिथि, सही समय और पूजा के नियमों की जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है. जीवन में सुख-शांति और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इस रात को बहुत खास माना गया है. व्रत रखने वाले सभी भक्तों को पूजा के दौरान कुछ खास बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इन नियमों का पालन करने से घर में हमेशा बरकत बनी रहती है. इस विशेष रात का धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत अधिक महत्व माना गया है. आइए इस लेख में जानते हैं कि इस पावन पर्व पर पूजा के समय किन चीजों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए.
तामसिक भोजन और लहसुन-प्याज का प्रयोग न करें
शरद पूर्णिमा की पावन रात को माता लक्ष्मी की पूजा करते समय तामसिक भोजन का इस्तेमाल भूलकर भी नहीं करना चाहिए. इस पवित्र दिन पर मांस, मदिरा, अंडा या किसी भी प्रकार के मांसाहारी भोजन से पूरी तरह दूर रहना बेहद जरूरी माना जाता है. इसके अलावा भोजन और प्रसाद में लहसुन तथा प्याज का उपयोग भी वर्जित माना गया है क्योंकि इन्हें तामसिक प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है.
माता लक्ष्मी को हमेशा शुद्ध, सात्विक और पवित्र चीजों का ही भोग लगाया जाना चाहिए ताकि उनकी कृपा बनी रहे. जो लोग इन नियमों का पालन नहीं करते हैं और अशुद्ध चीजों का प्रयोग करते हैं, उन्हें जीवन में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसलिए हमेशा शुद्धता का ध्यान रखकर ही सभी धार्मिक कार्य पूरे करने चाहिए, जिससे घर में सुख और समृद्धि का वास हमेशा बना रहता है.
काले रंग के कपड़े और अशुद्ध वस्तुएं
पूजा के समय काले रंग के कपड़ों का इस्तेमाल करना शास्त्रों में अशुभ माना गया है, इसलिए शरद पूर्णिमा की रात को काले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए. इसके अलावा पूजा की थाली में कभी भी खंडित या टूटी हुई मूर्तियों, खंडित चावल या गंदे बर्तनों का उपयोग नहीं करना चाहिए. माता लक्ष्मी को साफ-सफाई और लाल या पीले रंग की वस्तुएं बहुत पसंद हैं, इसलिए हमेशा चमकीले और पवित्र वस्त्र पहनकर ही पूजा में बैठना चाहिए. पूजा में इस्तेमाल होने वाली हर एक सामग्री पूरी तरह साफ और सुरक्षित होनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार का दोष न लगे. जो भक्त इन छोटी-छोटी बातों का पूरा ध्यान रखते हैं, उनके सभी काम बहुत ही आसानी से पूरे हो जाते हैं और घर में हमेशा बरकत बनी रहती है. इससे मां लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और अपनी कृपा बरसाती हैं.
क्रोध, अपमान और नकारात्मक विचारों का त्याग
भौतिक सामग्रियों के अलावा शरद पूर्णिमा की पावन रात को मन में किसी भी प्रकार का क्रोध, अहंकार या नकारात्मक विचार नहीं लाने चाहिए. इस विशेष रात पर किसी भी बुजुर्ग, महिला या गरीब व्यक्ति का अपमान करना माता लक्ष्मी को बहुत नाराज कर सकता है. घर में कलेश या अशांति का माहौल होने से माता लक्ष्मी का वास नहीं होता है और दरिद्रता आने लगती है. इसलिए इस रात को सभी के साथ प्रेम से रहना चाहिए और भगवान के भजन-कीर्तन में अपना मन लगाना चाहिए. जो लोग इन नियमों का पालन करते हुए पूरी श्रद्धा से मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं, उनके जीवन के सारे दुख समाप्त हो जाते हैं. इस प्रकार सही नियमों का पालन करने से मनुष्य का जीवन पूरी तरह से खुशियों और धन-धान्य से भर जाता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है.























































