नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि में पूरे नौ दिनों तक घरों से लेकर देवी मां के मंदिरों में माता रानी की आराधना की जाएगी। देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से मां भगवती भक्तों की हर मुराद को पूरी करती हैं। नवरात्रि के दौरान देवी मां के हर प्रसिद्ध मंदिरों में भक्तों की खास भीड़ रहती है। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां नवरात्रि के अलावा अन्य दिनों में भी भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
भारत में बगलामुखी के तीन ऐतिहासिक मंदिर हैं। कांगड़ा हिमाचल प्रदेश, दतिया और नलखेड़ा मध्यप्रदेश में। माता पीतांबरा देवी का प्राकट्य गुजरात में सौराष्ट्र क्षेत्र माना जाता है। कहते हैं कि इनका प्राकट्य हल्दी देश के जल से हुआ था। हल्दी का रंग पीला होने से इन्हें माता पीतांबरा कहा जाता है। यहां पर पीले रंग की मिठाई और पीले वस्त्र का बहुत महत्व है। यहां पर शनिवार को दर्शन पूजन करने की विशेष मान्यता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में मां बगलामुखी को 10 महाविद्याओं में आठवां स्थान मिला हुआ है।
बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा
तीन मुख वाली मां बगलामुखी का मंदिर मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे मौजूद है। माना जाता है मंदिर महाभारत के समय का है। कहते हैं पांडवों ने यहां महाभारत के युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए साधना की थी। मां के दरबार में स्मृति ईरानी, उमा भारती, गिरिराज प्रसाद, अमर सिंह, जयाप्रदा, विजयराजे सिंधिया के साथ-साथ कई बड़े नेता यहां आ चुके हैं। पहले माता को देहरा के नाम से जानते थे। यहां पूजा में हल्दी और पीले रंग के पूजन सामग्री का खास महत्व है। यहां पूजा में हल्दी और पूजन सामग्री का इस्तेमाल होता है।
बगलामुखी माता दतिया
मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित मां बगलामुखी का मंदिर पीताम्बरा पीठ के नाम से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यह शक्तिपीठ शत्रु नाश और राजसत्ता की अधिष्ठात्री देवी मां पीतांबरा को समर्पित है। यहां भक्त देवी बगलामुखी के रूप में मां की पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर में मां पीतांबरा के साथ खंडेश्वर महादेव और धूमावती देवी के भी दर्शन किए जा सकते हैं। मान्यता है कि सन 1935 में ‘स्वामीजी महाराज’ ने दतिया के नरेश के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर परिसर में मां बगलामुखी और धूमावती की प्रतिमाओं के अलावा हनुमान जी, काल भैरव, परशुराम और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यहां आकर भक्त आस्था, शक्ति और शांति का अद्भुत अनुभव करते हैं।
बगलामुखी मंदिर कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश में मौजूद मां बगलामुखी मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। माना जाता है यहां मत्था टेकने से सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं। साथ ही कोर्ट कचहरी के मामलों से भी छुटकारा मिलता है। मंदिर में आम लोगों से लेकर सिलेब्रिटी, नेता भी करने के लिए यहां आते रहते हैं। मंदिर के साथ प्राचीन शिआवली में शिवलिंग शिवलिंग स्थापित है, जहां लोग माता के दर्शन के बाद जलाभिषेक करते हैं। बताया जाता है मां हल्दी रंग के जल से प्रकट हुई थीं। पीले रंग की वजह से मां को पीतांबरी देवी भी कहते हैं। इन्हें पीला रंग काफी प्रिय है, इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग होता है।

























































