नई दिल्ली. उद्योगपति नवीन जिंदल ने जर्मनी की सबसे बड़ी स्टील कंपनी थिसेनक्रुप स्टील यूरोप के अधिग्रहण की पेशकश की है. जिंदल ने अपनी कंपनी जिंदल स्टील इंटरनेशनल के माध्यम से दिया गया है. यह प्रस्ताव अभी शुरुआती दौर में है. अभी तक यह नहीं बताया गया है कि यह सौदा कितने में होगा, लेकिन जिंदल इंटरनेशनल ने 2 अरब यूरो (करीब ₹21,000 करोड़) के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. यह निवेश मुख्य रूप से डिकार्बोनाइजेशन प्रोजेक्ट्स के लिए होगा, जिसमें डुइसबर्ग स्थित डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) प्लांट को पूरा करना और नए इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस लगाना शामिल है.
अगर यह सौदा सफल होता है तो जिंदल यूरोप के स्टील बाजार में मजबूत पकड़ बना लेंगे और टाटा स्टील तथा लक्ष्मी मित्तल (आर्सेलर मित्तल) के बाद यूरोप में बड़ी मौजूदगी दर्ज कराने वाले तीसरे भारतीय स्टीलमेकर होंगे. थिसेनक्रुप फिलहाल 11 मिलियन टन वार्षिक क्षमता रखता है, जबकि टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील की क्षमता करीब 35 मिलियन टन है. हाल के वर्षों में थिसेनक्रुप अपने स्टील कारोबार को सीमित करने की दिशा में काम कर रहा है और 2030 तक क्षमता घटाकर 9 मिलियन टन करने तथा 5,000 नौकरियां कम करने की योजना बना चुका है.
थिसेनक्रुप एजी ने की पुष्टि
थिसेनक्रुप एजी ने पुष्टि की है कि उसे जिंदल से एक गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और कहा कि इसकी समीक्षा आर्थिक व्यवहार्यता, ग्रीन ट्रांसफॉर्मेशन और रोजगार को ध्यान में रखकर की जाएगी. इस खबर के बाद फ्रैंकफर्ट स्टॉक एक्सचेंज पर थिसेनक्रुप एजी के शेयर 4.38% चढ़कर €11.44 पर बंद हुए. हरियाणा के कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद नवीन जिंदल पिछले कुछ वर्षों में तेजी से निजी स्टील साम्राज्य खड़ा कर चुके हैं. इसमें मोज़ाम्बिक और कैमरून की लौह अयस्क खदानें, ओमान में स्टील उत्पादन परियोजना और चेक गणराज्य में प्रोसेसिंग यूनिट शामिल हैं. उन्होंने वादा किया है कि कैमरून की खदानें थिसेनक्रुप को कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी और जर्मनी में लो-एमिशन स्टील उत्पादन के लिए और निवेश किया जाएगा.
सबसे बड़ा स्टील उत्पादक कपंनी
जर्मनी की औद्योगिक प्रगति में थिसेनक्रुप स्टील की ऐतिहासिक भूमिका रही है. यह दो सदियों से कारखानों और रेलवे को स्टील आपूर्ति करता रहा है और आज भी देश का सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है. लेकिन, अब सस्ते एशियाई प्रतिस्पर्धी, ऊंची बिजली लागत और सुस्त वैश्विक अर्थव्यवस्था ने कंपनी के कारोबार को प्रभावित किया है. पिछले पांच सालों में से चार साल कंपनी को परिचालन घाटा उठाना पड़ा है.
2023 में €2.1 अरब और पिछले साल €1 अरब की इंपेयरमेंट लॉस बुक करनी पड़ी. वर्तमान में कंपनी पुनर्गठन प्रक्रिया से गुजर रही है, जिसमें 11,000 नौकरियां (40%) घटाने का प्रस्ताव है. इनमें से 5,000 नौकरियां 2030 तक खत्म होंगी और बाकी 6,000 नौकरियां स्पिन-ऑफ या डाइवेस्टमेंट से जाएंगी.
टाटा के साथ जॉइंट वेचर बनाने का भी किया था प्रयास
थिसेनक्रुप ने 2019 में भारत की सबसे बड़ी स्टील निर्माता टाटा स्टील के साथ जॉइंट वेंचर बनाने का प्रस्ताव रखा था. लेकिन यूरोपीय आयोग ने एंटीट्रस्ट चिंताओं के चलते इस डील को रोक दिया. इसके बाद 2021 में ब्रिटिश स्टील कंपनी लिबर्टी स्टील के साथ अधिग्रहण की बातचीत भी विफल हो गई. जुलाई 2024 में थिसेनक्रुप ने TKSE में 20% हिस्सेदारी चेक अरबपति डेनियल क्रेटिन्स्की की कंपनी ईपीसीजी को बेच दी. आगे 50:50 जॉइंट वेंचर पर बातचीत जारी है.
हालांकि, कर्मचारियों की यूनियन IG Metall ने आलोचना की थी कि क्रेटिन्स्की ने अभी तक अपनी रणनीतिक योजना के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी. जिंदल का नया प्रस्ताव अब सीधे क्रेटिन्स्की को चुनौती देगा, जिन्होंने जर्मनी में विशेषकर ऊर्जा और खुदरा क्षेत्र में भारी निवेश किया है. थिसेनक्रुप के डिप्टी सुपरवाइजरी बोर्ड चेयरमैन और IG Metall के वरिष्ठ सदस्य जुएर्गन केर्नर ने जिंदल के प्रस्ताव को अच्छी खबर बताया.

























































