नई दिल्ली: अगले 10 सालों में वैज्ञानिक ब्रह्मांड का ऐसा नजारा देख सकते हैं, जो अब तक कभी नहीं देखा गया. यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट (UMass Amherst) के वैज्ञानिकों का कहना है कि 90% संभावना है कि हमें ब्लैक होल के फटने जैसा विशाल विस्फोट दिखे. यह न सिर्फ खगोल विज्ञान की दशकों पुरानी थ्योरी को साबित करेगा, बल्कि ब्रह्मांड में मौजूद हर तरह के कणों का संग्रह भी सामने लाएगा. वे भी जिन्हें हम अब तक खोज ही नहीं पाए.
ब्लैक होल की मौत और ‘हॉकिंग रेडिएशन’
ब्लैक होल को हमेशा ऐसी जगह माना जाता रहा है, जहां से कुछ भी बाहर नहीं निकलता. लेकिन 1974 में महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने थ्योरी दी थी कि ब्लैक होल धीरे-धीरे कण उत्सर्जित करते हैं, जिसे ‘हॉकिंग रेडिएशन’ कहा जाता है. यही प्रक्रिया अंत में ब्लैक होल को खत्म कर देती है. आमतौर पर यह बेहद धीमी होती है, इसलिए बड़े ब्लैक होल की मौत अरबों-खरबों साल बाद होगी. लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि ‘प्राइमॉर्डियल ब्लैक होल’ (PBHs) यानी बिग बैंग के तुरंत बाद बने छोटे ब्लैक होल, आज के समय में फट सकते हैं.
विस्फोट से निकलेगा ब्रह्मांड का हर कण
UMass Amherst के वैज्ञानिकों का कहना है कि इन छोटे ब्लैक होल्स की अंतिम सांसें बेहद धमाकेदार होंगी. वे सुपरनोवा जैसे विस्फोट करेंगे और इस दौरान हर तरह का मौलिक कण बाहर निकलेगा. इसमें वे कण भी होंगे जिन्हें हम जानते हैं – जैसे इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रॉन – और वे भी, जिन्हें हम अभी सिर्फ थ्योरी में मानते हैं – जैसे डार्क मैटर. सबसे बड़ी खोज होगी उन ‘अनजान-अनजाने’ कणों की, जिनके बारे में हमारी कल्पना तक नहीं है.
भौतिक विज्ञानी जोआकिम इगुआज़ जुआन कहते हैं, ‘यह ऐसा होगा जैसे हमें ब्रह्मांड की हर चीज का पूरा रिकॉर्ड मिल गया हो. यह भौतिकी को पूरी तरह बदल देगा और हमें ब्रह्मांड की कहानी दोबारा लिखने का मौका देगा.’
नई थ्योरी: डार्क इलेक्ट्रॉन का खेल
अब तक माना जाता था कि ऐसे विस्फोट बेहद दुर्लभ हैं, शायद हर 1 लाख साल में एक बार. लेकिन ताजा रिसर्च ने इस धारणा को चुनौती दी है. वैज्ञानिकों ने स्टैंडर्ड मॉडल फिजिक्स में कुछ बदलाव कर एक नया सिमुलेशन बनाया. इसमें उन्होंने ‘डार्क इलेक्ट्रॉन’ नामक कण को शामिल किया, जो सामान्य इलेक्ट्रॉन से भारी है और ब्लैक होल को एक हल्का चार्ज देता है. इससे PBHs कुछ समय के लिए स्थिर रह जाते हैं और उनका विस्फोट टल जाता है. इसका मतलब है कि वे अभी भी जिंदा हैं और आने वाले समय में फट सकते हैं.
हर 10 साल में एक धमाका?
रिसर्च टीम का कहना है कि इस मॉडल के अनुसार औसतन हर 10 साल में एक ब्लैक होल विस्फोट हमारे देखने की सीमा में होना चाहिए. हमारी मौजूदा गामा-रे ऑब्जर्वेटरी इस विस्फोट को पकड़ सकती है. अगर ऐसा हुआ तो यह पहली बार होगा जब हमें सीधे तौर पर हॉकिंग रेडिएशन के सबूत मिलेंगे. साथ ही, प्राइमॉर्डियल ब्लैक होल्स के अस्तित्व की पुष्टि होगी.

























































