भुवनेश्वर। ओडिशा की राजनीति में मंगलवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब राज्यसभा की चार सीटों के लिए हुए चुनाव में उम्मीद से कहीं ज्यादा क्रॉस वोटिंग देखने को मिली। तमाम सियासी घेराबंदी और रिसॉर्ट पॉलिटिक्स के बावजूद बीजद और कांग्रेस के 11 विधायकों ने अपनी पार्टी के व्हिप को दरकिनार कर दिया।
इस बड़े उलटफेर का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिला, जिसने चार में से तीन सीटों पर कब्जा जमा लिया है। वहीं, बीजू जनता दल (बीजद) को मात्र एक सीट से संतोष करना पड़ा।
चुनावी नतीजे: संख्या बल पर भारी पड़ी रणनीति
संख्या बल के हिसाब से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार की जीत पहले से तय मानी जा रही थी। वहीं बीजद की ओर से संतृप्त मिश्र का चयन भी सुनिश्चित था।
असली मुकाबला चौथी सीट को लेकर था, जहां संख्या गणित बीजद-कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में झुकता दिख रहा था। लेकिन मतदान के दौरान समीकरण पूरी तरह बदल गए।
भाजपा समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे ने गठबंधन के उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता को करारी शिकस्त देते हुए चौथी सीट अपने नाम कर ली। जो उम्मीद से बिलकुल अलग रहा।
व्हिप का उल्लंघन: किसने की क्रॉस वोटिंग?
ओडिशा विधानसभा के सभी 147 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इनमें से 11 विधायकों ने अपनी पार्टी की लाइन से हटकर मतदान किया।
कांग्रेस के बागी (3 विधायक):
- रमेश जेना (सनाखेमुंडी विधायक)
- दाशरथी गमांग (मोहना विधायक)
- सोफिया फिरदौस (कटक बारबाटी विधायक)
बीजद के बागी (8 विधायक):
इनमें चक्रमणिकंहर (बालिगुड़ा), सौभिक बिस्वाल (कटक-चौद्वार), नव किशोर मलिक (जयदेव), सुभासिनी जेना (बस्ता), देवी रंजन त्रिपाठी (बांकी) और रमाकांत भोई (तिर्तोल) शामिल हैं। इसके अलावा निलंबित विधायक सनातन महाकुड़(चंपुआ) और अरविंद महापात्र (पाटकुरा) ने भी क्रॉस वोटिंग की।
फेल हो गई घेराबंदी: रिसॉर्ट में भी नहीं रुके विधायक
क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग को रोकने के लिए कांग्रेस ने अपने 14 में से 8 विधायकों को बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में रखा था, लेकिन यह रणनीति भी काम नहीं आई। वहीं बीजद प्रमुख नवीन पटनायक हर दिन नवीन निवास में विधायकों की हाजिरी ले रहे थे।
पार्टी के अंदर सबसे बड़ा झटका देवी रंजन त्रिपाठी और रमेश जेना के क्रॉस वोटिंग करने से लगा है, जिसकी उम्मीद पार्टी नेतृत्व को बिल्कुल नहीं थी। सुभासिनी जेना और सोफिया फिरदौस जैसी नेत्रियों के पाला बदलने की अटकलें पहले से थीं, लेकिन संख्या 11 तक पहुंच जाएगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।

























































