नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने जीएसटी दरों में सुधार के लिए पहले से ही पूरी तैयारी कर ली थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छह महीने तक विभिन्न समूहों के साथ कई बैठकों में विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मध्यम वर्ग और गरीब जनता को बड़ी राहत दी जाए, जिसके लिए कई स्तरों पर विचार-विमर्श हुआ। गृह मंत्री अमित शाह ने भी अलग-अलग बैठकों में हिस्सा लिया ताकि संवेदनशील वस्तुओं पर टैक्स को लेकर कोई राजनीतिक विवाद न हो और राज्यों को राजस्व संबंधी चिंताओं पर आश्वस्त किया जा सके। पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि राजस्व की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए ताकि राज्य सरकारें संतुष्ट रहें और संघीय ढांचा मजबूत रहे।
राज्यों ने जताई राजस्व कमी की चिंता
इसके बाद 3 सितंबर को जीएसटी परिषद की बैठक बुलाई गई। बैठक में विपक्षी राज्यों ने राजस्व कमी को लेकर चिंता जताई। खासकर पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल और कर्नाटक ने टैक्स कटौती का विरोध किया। इस कारण बैठक, जो शाम 7 बजे तक खत्म होनी थी, रात 9:30 बजे तक चली। पंजाब और पश्चिम बंगाल बाद में मान गए, लेकिन कर्नाटक और केरल अड़े रहे। बताया जाता है कि ये दोनों राज्य चाहते थे कि केंद्र राजस्व हानि की भरपाई का भरोसा दे। विपक्षी राज्यों ने बैठक को अगले दिन तक टालने की मांग की, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अंतिम निर्णय तक पहुंचने के लिए रात भर बैठने को तैयार थीं।
तो करा ली जाए वोटिंग
जब बैठक में गतिरोध बना रहा, तो छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सुझाव दिया कि अगर कर्नाटक और केरल सहमत नहीं हैं, तो वोटिंग कराई जाए। बता दें कि जीएसटी परिषद में आमतौर पर सहमति से निर्णय लिए जाते हैं, और वोटिंग बहुत कम होती है। चौधरी ने यह बात बार-बार दोहराई। आखिरकार, निर्मला सीतारमण को कहना पड़ा कि जो वोटिंग चाहते हैं, वे स्पष्ट रूप से कहें। वित्त मंत्री के तेवर से विपक्षी राज्यों को डर लगा कि वोटिंग में विरोध करने से जनता नाराज हो सकती है। तभी पश्चिम बंगाल ने हस्तक्षेप किया और कर्नाटक तथा केरल को मना लिया। इस तरह सभी की सहमति बनी, और वित्त मंत्री ने देर रात फैसले की घोषणा की।
राज्यों के साथ नहीं होगा अन्याय
बताया जाता है कि बैठक में निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट कहा कि किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा। उन्होंने मेज की ओर इशारा करते हुए कहा कि यहां रखा पैसा केंद्र और राज्य, दोनों का है। अगर राज्यों को नुकसान हो रहा है, तो केंद्र को भी हो रहा है। लेकिन अभी हमारा लक्ष्य जनता को राहत देना है। उन्होंने कहा कि केंद्र के पास अलग से पैसा नहीं है, इसलिए राज्यों और केंद्र को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्यों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

























































