नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में भविष्य को जानने के लिए नक्षत्र और राशि का सहारा लिया जाता है, दोनों का अपना ही महत्व होता है. लेकिन जब बात श्रेष्ठ और उत्तम परिणाम कि आती है तो नक्षत्रों का स्थान सबसे ऊंचा माना जाता है. ग्रह और नक्षत्रों की चाल कई तरह से व्यक्ति के जीवन पर असर डालती है जैसे ग्रहों की चाल व्यक्ति के जीवन का अशुभ और शुभ तय करती है तो वही नक्षत्र की गणना से व्यक्ति के जीवन की सहेली और स्वभाव का पता चलता है.
आकाश मंडल को समझने के लिए 12 राशि और 27 नक्षत्र में बांटा गया है. वैदिक शास्त्र के अनुसार नक्षत्र आकाश में बने तारा समूह को कहा जाता है. यह वापस होता है जिससे गुजर कर चंद्रमा अपनी पृथ्वी की परिक्रमा करता है चंद्रमा को लगभग 27 दिन लगते हैं एक परिक्रमा को पूरा करने के लिए. ऐसे में चंद्रमा सितारों के समूह के बीच में भ्रमण करते हैं.
जैसे सूर्य मेष राशि से लेकर मीन राशि तक हर महीने भ्रमण करते हैं उसी प्रकार चंद्रमा भी 27 नक्षत्रों से होकर गुजरता है. इस समय को नक्षत्र मास भी कहा जाता है, 27 दोनों का यह नक्षत्र मास होता है. आकाश मंडल में कुल नौ ग्रह है और इन 27 नक्षत्रों को इन ग्रहों में बांटा गया है. हर एक ग्रह तीन नक्षत्र का स्वामी होता है.
प्रमुख नक्षत्र और उनके प्रभाव
पौराणिक कथाओं के अनुसार यह 27 नक्षत्र दक्ष प्रजापति की पुत्रियां है जिनका विवाह चंद्रमा से हुआ था. जिस भी नक्षत्र में व्यक्ति का जन्म होता है वह उसके पूरे जीवन शैली और व्यवहार को निर्धारित करती हैं.आइए कुछ प्रमुख नक्षत्र और उनकी विशेषताओं को समझते हैं :-
अश्विन नक्षत्र: यह नक्षत्र वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सबसे पहले नक्षत्र है इस नक्षत्र में जन्मे लोगों अधिक सुंदर चतुर और सौभाग्यशाली माने जाते हैं और अपनी आधुनिक सोच के लिए अपने मित्रों में प्रसिद्ध होते हैं. इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति बहुत ऊर्जावान और महत्वाकांक्षी होते हैं. इन्हें सभी लोग बहुत पसंद करते हैं. वह किसी का भी हस्तक्षेप अपने कार्य में पसंद नहीं करते हैं . यह लोग अच्छे जीवनसाथी और आदर्श मित्र साबित होते हैं .
भरणी नक्षत्र: इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है, जिसकी वजह से इस नक्षत्र में जन्मे लोग दृढ़ निश्चयी, चतुर और सदा सत्य बोलने वाले होते हैं. यह लोग काफी आकर्षक और सुंदर होते हैं. इनका स्वभाव लोगों को आकर्षित करता है इनके अनेक मित्र होते हैं और मित्रों में इनकी अत्यंत लोकप्रियता होती है. इनके जीवन में प्रेम सर्वपरी होता है. यह दिल से सोचने वाले व्यक्ति होते हैं. यह जो भी चीज ठान लेते हैं उसे पूरा कर कर ही बैठते हैं. इनका समाज में मान सम्मान हमेशा बना रहता है.
रोहिणी नक्षत्र: इस नक्षत्र के स्वामी स्वयं चंद्रमा हैं जिसकी वजह से इस नक्षत्र में जन्मे लोग काफी चंचल और कल्पनाशील व्यक्ति होते हैं. इन लोगों की सबसे बड़ी कमी यह रहती है कि यह कभी भी एक मुद्दे में अपनी राय कायम नहीं रखते हैं. यह लोक स्वभाव से काफी मिलनसार होते हैं. लेकिन साथ ही जीवन में अपनी सुख सुविधाओं को पाने की कोशिश भी करते रहते हैं यह लोग शारीरिक रूप से काफी कमजोर होते हैं इसलिए मौसम में छोटा सा बदलाव भी ने रोगों में जकड़ लेता है.
नक्षत्र या राशि: क्या है श्रेष्ठ?
राशि सौर मंडल के 30 डिग्री के बड़े हिस्से को दर्शाती है, जबकि एक नक्षत्र केवल 13 डिग्री 20 मिनट का होता है. इसका अर्थ है कि नक्षत्र गणना व्यक्ति के व्यक्तित्व के उन छोटे पहलुओं को भी उजागर कर सकती है जो राशि फल में छूट जाते हैं. उदाहरण के लिए, रेवती नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति रूढ़िवादी होने के बावजूद व्यवहार में लचीलापन रखता है, जबकि स्वाति नक्षत्र के लोग स्वतंत्र आत्मा के स्वामी होते हैं और किसी के आदेश का पालन करना पसंद नहीं करते.
यदि आप अपने स्वभाव, करियर और जीवन की दिशा के बारे में अधिक सटीक और व्यक्तिगत जानकारी चाहते हैं, तो जन्म नक्षत्र का अध्ययन राशि की तुलना में अधिक सटीक होता है. यह सच है कि जन्म नक्षत्र इंसान के आगामी जीवन पर अपनी गहरी छाप छोड़ता है.

























































