नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ती ऑनलाईन बिजनेस मॉडल ने लोगों की जिंदगी में काफी सुविधा मुहैया करा दी है। ऐसे में कहना सही होगा कि ऑनलाइन शॉपिंग.. आज हर घर की जरूरत बन चुकी है। रोज के काम की लगभग हर चीज एक क्लिक से घर दी पहुंचा जाती है ..वो भी मिनटों में। लेकिन इस सुविधा के साथ शिकायतें भी बहुत हैं। किसी को नकली प्रोडक्ट मिला, किसी को टूटा सामान, किसी का रिफंड अटक गया तो किसी को “डिलीवर” दिखाकर सामान ही नहीं मिला। ऐसे में कंज्यूमर यानि आम ग्राहक करे तो क्या करे…
कानून है आपके साथ
यदि आपको ऑनलाईन शॉपिंग कंपनियों के ग्राहक हैं, तो चिंता की कोई बात नहीं है, अब भारतीय उपभोक्ताओं के अधिकार पहले से ज्यादा मजबूत हैं। उपभोक्ता हितों की रक्षा करने से जुड़े .. नए कानून उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम Consumer Protection Act, 2019 भारत में 20 जुलाई 2020 से प्रभावी हुआ, जो 1986 के पुराने कानून की जगह लेता है।
नया कानून अमेजॉन, फ्लिपकॉर्ट, जोमैटो, स्विगी जैसी ऑनलाइन कंपनियों के साथ ऑफलाइन दूकानों से, दोनों तरह के लेन-देन को कवर करता है। इसके तहत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण, CCPA बनाया गया है, जो अनुचित व्यापार की शिकायतों की जांच और कार्यवाही कर सकता है। इस कानून ने उपभोक्ता के छह अधिकारों को साफ किया है….
- खतरनाक वस्तुओं के खिलाफ सुरक्षा का अधिकार
- गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता के बारे में सूचना का अधिकार
- चुनने का अधिकार
- निवारण का अधिकार
- उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार
- सुनवाई का अधिकार
अब सिर्फ दुकानदार नहीं, प्लेटफॉर्म भी जिम्मेदार
पहले क्या होता था कि ग्राहकों की शिकायतों को अनसुना कर दिया जाता था। किसी भी शिकायत को ऐसी कंपनियां दरकिनार कर देती थी या सामान भेजने वाले पर जिम्मेदारी डाल देती थीं। कंपनियां अक्सर यह कहकर बच निकलती थीं कि “हम सिर्फ प्लेटफॉर्म हैं, विक्रेता जिम्मेदार है।” लेकिन नए कानूनों ने तस्वीर बदल दी है। इसके तहत …
- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर गलत जानकारी देकर प्रोडक्ट बेचा गया तो प्लेटफॉर्म भी जिम्मेदार माना जा सकता है।
- नकली सामान भेजा गया, रिफंड रोका गया या भ्रामक विज्ञापन दिखाए गए तो भी प्लेटफॉर्म भी जिम्मेदार हो सकता है।
- ई-कॉमर्स कंपनियां कीमतों में हेरफेर नहीं कर सकतीं, ग्राहकों के साथ भेदभाव नहीं कर सकतीं
- किसी भी प्रोडक्ट के बारे में फेक रिव्यू या गलत विज्ञापन भी नहीं चला सकतीं।
किन मामलों में कर सकते हैं शिकायत?
सामान के बारे में गलत जानकारी देने , अनुचित व्यापार व्यावहार के मामले से जुड़ी शिकायतें उपभोक्ता शिकायत के दायरे में आती हैं। अगर आपके साथ इनमें से कुछ भी हुआ है तो आप कानूनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं…
- नकली या डुप्लीकेट प्रोडक्ट मिला
- एक्सपायर्ड या खराब सामान मिला
- दिखाई गई चीज और असली सामान अलग मिला
- रिटर्न रिक्वेस्ट जानबूझकर रिजेक्ट की गई
- सामान लौटाने के बाद भी रिफंड नहीं मिला
लोगों में बढ़ रही जागरुकता
- दरअसल, डिजिटल इंडिया के बढ़ते चलन ने एक तरह से उपभोक्ताओं को भी जागरूक कर दिया है। पहले लोग छोटे नुकसान को नजरअंदाज कर देते थे। लेकिन अब ग्राहक जागरूक हो रहा है।
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम , केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण, सोशल मीडिया, ऑनलाइन कोर्ट सिस्टम ने आम लोगों को आवाज दी है।
- कंपनियों पर भी दबाव बढ़ रहा है कि वे सिर्फ बिक्री पर नहीं, बल्कि ग्राहक के भरोसे पर भी काम करें।
- क्योंकि किसी भी व्यापार का भविष्य तभी सुरक्षित रहेगा जब उससे जुड़े ग्राहकों को यह भरोसा होगा कि अगर उसके साथ धोखा हुआ तो कानून उसके साथ खड़ा है और उनकी शिकायतों का उचित तरीके से निबटारा होगा।

























































