नई दिल्ली। दुनियाभर में खाने-पीने की चीजें और कृषि उत्पाद लगातार महंगे हो रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि आम आदमी की थाली पर महंगाई की भारी मार पड़ रही है. वैश्विक स्तर पर मौसम की मार, जलवायु परिवर्तन और लाल सागर तथा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई चेन पूरी तरह लड़खड़ा गई है. इसका सीधा असर परिवहन लागत और लॉजिस्टिक्स खर्च पर पड़ा है, जिससे हर जरूरी चीज के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं.
चावल और चीनी क्यों इतने महंगे हो गए हैं?
चावल के दाम पिछले दो साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक चावल उत्पादन में 2.4% की गिरावट आ सकती है. भारत में भी चावल का उत्पादन पिछले साल के 154 मिलियन टन से घटकर करीब 144 मिलियन टन (6.5% की कमी) रहने का अनुमान है. सप्लाई टाइट होने और लॉजिस्टिक्स खर्च में बेतहाशा बढ़ोतरी (कंटेनर का किराया 5,000 डॉलर से बढ़कर लगभग 55,000 डॉलर हो जाना) के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चावल के फ्यूचर्स 30% से 70% तक महंगे हो गए हैं.
वहीं, चीनी के मोर्चे पर भी राहत नहीं है. ब्राजील, भारत, थाईलैंड और यूरोपीय संघ (EU) जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में खराब मौसम की वजह से फसलों को 10% से 20% तक का नुकसान हुआ है. यूरोपीय संघ में उत्पादन 19% और थाईलैंड में 17% तक कम होने की आशंका है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की रिपोर्ट बताती है कि भारत का चीनी उत्पादन 14% घटकर 29.5 मिलियन टन रह सकता है. कुल मिलाकर वैश्विक स्तर पर 3 से 3.5 मिलियन टन चीनी की कमी का अनुमान है और कीमतें लगभग 35% तक बढ़ चुकी हैं.
कपास, तेल और दालों के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?
खाद्य तेलों और अन्य कृषि उत्पादों का हाल भी कुछ ऐसा ही है:
जैव ईंधन (Biofuel): क्रूड ऑयल की कीमतों के कारण ग्लोबल वेजिटेबल ऑयल का 27% हिस्सा अब बायोफ्यूल में डायवर्ट किया जा रहा है, जिससे सोयाबीन और सोयाबीन तेल के दाम 20% से 40% और रेपसीड ऑयल के दाम 23% तक बढ़ गए हैं.
कपास और रबर: WASDE रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक कपास उत्पादन घटकर 25.8 मिलियन टन रह गया है. औद्योगिक कृषि जिंसों में कपास 25% और रबर 44% महंगा हो चुका है.
दालें और अन्य फसलें: दालों में चना 23%, उड़द 24% और मटर 47% तक महंगे हो गए हैं, जिसमें सरकारी आयात शुल्क में बढ़ोतरी का भी असर है. इसके अलावा जौ (Barley) 44%, मक्का (Corn) 9% और चाय 10% महंगी हुई है.
इन तमाम वजहों से वैश्विक महंगाई लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. परिवहन संकट और फसल खराब होने के इन मिले-जुले असर से आने वाले दिनों में राहत मिलने के आसार फिलहाल कम ही नजर आ रहे हैं.























































