नई दिल्ली: जीएसटी परिषद ने इस सप्ताह की शुरुआत में हुई बैठक में तमामा उत्पादों टैक्स की दर घटा दी है. इससे आम आदमी को सीधा फायदा मिलेगा, लेकिन सरकार के खजाने पर इसका कितना असर पड़ेगा. इस सवाल का जवाब भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी नवीनतम शोध रिपोर्ट में दे दिया है. रिपोर्ट में बताया है कि जीएसटी दरों में कमी के जरिये सरकार को 3,700 करोड़ रुपये का न्यूनतम राजस्व नुकसान होगा. इससे पहले सरकार ने अनुमान लगाया था कि जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने का शुद्ध राजकोषीय प्रभाव सालाना आधार पर 48,000 करोड़ रुपये होगा.
रिपोर्ट के अनुसार, विकास और उपभोग में वृद्धि को देखते हुए न्यूनतम राजस्व हानि 3,700 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. इसका राजकोषीय घाटे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में मौजूदा चार-स्तरीय ढांचे को दो-स्तरीय ढांचे से बदल दिया गया है. इसमें 18 प्रतिशत एवं पांच प्रतिशत की मानक दर और कुछ चुनिंदा वस्तुओं तथा सेवाओं पर 40 प्रतिशत की दर शामिल की गई है. सरकार ने 12 और 28 फीसदी की दर को खत्म कर दिया है.
औसत टैक्स के भार में भी कमी
रिपोर्ट में कहा गया कि जीएसटी दर को युक्तिसंगत बनाने से उत्पादों की लागत में भी कमी आएगी. इसका बैंकिंग क्षेत्र पर काफी हद तक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. जीएसटी दरें कम होने से टैक्स की प्रभावी औसत दर भी साल 2017 में लागू होने के समय 14.4 प्रतिशत से घटकर 9.5 प्रतिशत हो गई है. जीएसटी के वर्तमान में पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत की चार दरें हैं.
कितनी वस्तुओं पर जीएसटी 5 फीसदी
रिपोर्ट में कहा गया कि चूंकि आवश्यक वस्तुओं (लगभग 295) की जीएसटी दर युक्तिकरण 12 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत या शून्य हो गई है. लिहाजा चालू वित्तवर्ष 2025-26 में इस श्रेणी में उपभोक्ता आधारित महंगाई दर 0.25 प्रतिशत से 0.30 प्रतिशत तक कम हो सकती है. इसमें कहा गया कि कुल मिलाकर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर 2026-27 तक 0.65 प्रतिशत से 0.75 प्रतिशत अंकों के बीच नियंत्रित रह सकती है.
जीएसटी घटाने से क्या होगा फायदा
सरकार ने लगभग सभी जरूरी चीजों पर जीएसटी की दरें घटा दी हैं. जाहिर है कि त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को सस्ता सामान मिलने पर उनकी बचत होगी और खरीदारी भी बढ़ेगी. खरीदारी बढ़ने से बाजार में डिमांड बढ़ेगी, जिससे मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा मिलेगा. इस तरह, डिमांड और उत्पादन दोनों में ग्रोथ आएगी और यही ग्रोथ आखिर में अर्थव्यवस्था की विकास दर को बढ़ावा देगा. सरकार ने काफी सोच-समझकर यह फैसला लिया है.

























































