नई दिल्ली: अंतरिक्ष यानों और कक्षा में चक्कर काट रहे उपग्रहों को दुश्मन के हमलों से सुरक्षित रखने के लिए भारत एक बड़ी योजना विकसित करने पर काम कर रहा है। जानकारी के मुताबिक कक्षा में एक भारतीय उपग्रह के दुश्मन के एक स्पेसक्राफ्ट से बाल-बाल बचने के बाद इस तरह की जरूरत पर ध्यान दिया गया है, क्योंकि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बहुत बड़ा खतरा उजागर हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘ बॉडीगार्ड सैटेलाइट ‘एक बड़ी योजना का हिस्सा है, लेकिन इससे भविष्य में हमारे उपग्रह दुश्मनों की बुरी नजरों से सुरक्षित रखे जा सकेंगे।
सैटेलाइट की रक्षा के लिए ‘बॉडीगार्ड’
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार एक ऐसा सैटेलाइट बॉडीगार्ड विकसित करना चाहती है, जो कक्षा में परिक्रमा कर रहे सैटेलाइट्स के संभावित खतरों को पहचान सके और उसकी वजह से पैदा हो रहे खतरों से निपटने में सहायता करे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मामले की जानकारी देने वाले लोगों ने इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए नाम नहीं जाहिर होने देने का आग्रह किया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सैटेलाइट ने अहम भू्मिका निभाई थी। तब पाकिस्तान, चीन के भरोसे था।
सैटेलाइट के बाल-बाल बचने का दावा
रिपोर्ट में लोगों के हवाले से दावा किया गया है कि इसकी जरूरत तब महसूस की गई जब कथित रूप से एक पड़ोसी देश का स्पेसक्राफ्ट खतरनाक रूप से भारत के एक सैटेलाइट के करीब आ गया था। इसके मुताबिक 2024 के मध्य में बाल-बाल बचा यह सैटेलाइट भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ( ISRO ) का था। भारत के उस कथित सैटेलाइट के साथ यह घटना तब हुई, जब वह पृथ्वी से लगभग 500-600 किलोमीटर ऊंचाई पर था। अंतरिक्ष का यह क्षेत्र एलन मस्क के कम्युनिकेशन सैटेलाइट स्टारलिंक नेटवर्क की वजह से बहुत ही ज्यादा भीड़ भाड़ वाला बन चुका है।
भारत क्षमता को परखने की कोशिश?
रिपोर्ट के मुताबिक तब पड़ोसी मुल्क का एक अंतरिक्ष यान (spacecraft) इसरो के सैटेलाइट के करीब एक किलोमीटर के दायरे में आ गया था। मामले की जानकारी रखने वाले का कहना है कि वह संभवत: मिलिट्री सैटेलाइट था, जो उसके लिए जमीन की मैपिंग और मॉनिटरिंग का काम कर रहा था। लोगों ने बताया कि हालांकि दोनों आपस में टकराए तो नहीं, लेकिन असामान्य रूप से इतने करीब आने का मतलब है कि संभवत: दूसरे देश ने इसकी क्षमता को परखने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक इसरो या अंतरिक्ष विभाग ने इसपर टिप्पणी के आग्रह पर जवाब नहीं दिया।
करीब 50 सर्विलांस सैटेलाइट की योजना
रिपोर्ट के अनुसार सैटेलाइट प्रोटेक्शन प्रोजेक्ट या सैटेलाइट बॉडीगार्ड मोदी सरकार की अंतरिक्ष की कक्षा में मौजूद भारतीय उपग्रहों की रक्षा के लिए बड़ी योजना का एक हिस्सा है, जिसके तहत करीब 50 सर्विलांस सैटेलाइट बनाए जाने हैं। ऐसा पहला सैटेलाइट अगले साल लॉन्च होने की योजना है। इस प्रोजेक्ट पर 270 अरब रुपये की लागत आने का अनुमान है।
LiDAR सैटेलाइट बनाने का लक्ष्य
स्पेसक्राफ्ट से जुड़े विषयों पर नजर रखने वाली वेबसाइट N2Y0.com के अनुसार भारत के पास 100 से ज्यादा सैटेलाइट हैं, जबकि पाकिस्तान के पास मात्र 8 हैं। जबकि, चीन के पास यह संख्या 930 से अधिक है। चीन इस मामले में लगातार अपनी क्षमता बढ़ाता जा रहा है। इस मामले की जानकारी रहने वालों का कहना है कि भारत सरकार अब इस मुद्दे के समाधान के लिए स्टार्टअप के साथ भी काम कर रही है। हालांकि, अभी इसको लेकर चर्चा ही चल रही है, लेकिन लक्ष्य है लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (LiDAR) सैटेलाइट बनाना, जो जल्द से जल्द खतरे को पहचान सके और सतह से समय रहते लक्षित उपग्रह को अपने स्थान से हटने का आदेश दिया जा सके।
‘कुछ स्टार्टअप्स इसपर काम कर रहे हैं’
इसरो के कैपिसिटी बिल्डिंग प्रोग्रम ऑफिस के पूर्व डायरेक्टर और एक स्वतंत्र कंसलटेंट सुधीर कुमार एन ने कहा कि ’24×7 आधार पर हमारे पास ऐसी ऑर्बिट ट्रैकिंग क्षमा नहीं है।……लेकिन कुछ स्टार्टअप्स इसपर काम कर रहे हैं।’ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष में इसरो ने राष्ट्रीय सुरक्षा में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी; जिसकी वजह से भारतीय सशस्त्र सेना दुश्मन के ठिकानों पर इतने सटीक हमलों में सफल रही। इस दौरान चीन अपने सैटेलाइट की मदद से पाकिस्तान को लाइव कवरेज दे रहा था, जिसकी रिपोर्ट पहले आ चुकी हैं।

























































