- 10,000 से अधिक युवा होंगे बेरोजगार, 25000 से अधिक परिवार प्रभावित
- रायगड़ा में सभी पार्टियों के हजारों कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन
- ओडिशा माइनिंग कार्पोरेशन के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप, सरकार को अरबों के राजस्व का नुकसान
अंजन साबत
नई दिल्ली/भुवनेश्वर। देश की सबसे बड़ी एलुमीनियम उत्पादन कंपनी वेंदाता का विवादों से चोली दामन का नाता है। बात आदिवासियों के उत्पीड़न की हो या अरबों के राजस्व चोरी की। वेदांता ग्रुप के मालिक अनिल अग्रवाल अपनी ऊंची पहुंच और सरकारी अधिकारियों को बड़े सूटकेस भेजकर हर मामले को ठंडे बस्ते में डालने में माहिर है। राजनेताओं और बड़े अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ कर न केवल राज्य सरकार को अरबों का चूना लगा रहे हैं बल्कि आम जनता के हितों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।

वेदांता ग्रुप की इन कारगुजारियों के लिए खिलाफ कोई बड़ी सरकारी एजेंसी कार्रवाई करने से बचती रही है, जिसका सीधा फायदा वेदांता ग्रुप के मालिक अनिल अग्रवाल उठाते आ रहे है। वेदांता ग्रुप की इन्हीं मनमानियों के विरोध में रायगड़ा में सड़कों में जनसैलाब उतरा और वेदांता ग्रुप चेतावनी दी कि अब कंपनी की मनमानी नहीं चलेगी। शुक्रवार को कोरापुट जिले के लक्ष्मीपुर ब्लॉक की सड़कों में ओडिशा माइनिंग कार्पोरेशन (ओएमसी) और वेदांता ग्रुप के लिए खिलाफ जनसैलाब उतरा।

रायगड़ा और कोरापुट जिले की सभी पार्टियों के पंद्रह हजार से अधिक कार्यकर्ताओं के साथ आसपास के इलाके के स्थानीय लोग उड़ीसा माइनिंग कार्पोरेशन और वेदांता के खिलाफ रैली निकालकर मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी को ओएमसी जिलाधिकारी के जरिए अपना ज्ञापन सौंपा। आंदोलन की अगुवाई कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और रायगड़ा कांग्रेस जिलाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद पांडा वेदांता कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि ओडिशा माइनिंग कार्पोरेशन की तरफ से एलुमीनियम उत्पादन के लिए वेदांता ग्रुप को तीन मिलियन टन बॉकसाइट दिया जाता था, अब वेदांता ग्रुप ने छह मिलियन टन बॉकसाइट के लिए आवेदन किया है। जबकि पूरे इलाके की बॉकसाइट उत्पादन की क्षमता की छह मिलियन टन है।

ऐसे में अगर सारा बॉकसाइट वेदांता ग्रुप को आवंटित कर दिया जाएगा तो लक्ष्मीपुर ब्लॉक में स्थापित होने वाले आदित्य बिरला ग्रुप के प्लांट बॉकसाइट का आपूर्ति नहीं होगी। इससे कई वर्षों से बन रहा लक्ष्मीपुर का कंसारीगुड़ा का प्लांट बंद हो जाएगा। इससे करीबन दस हजार से अधिक युवाओं सीधे तौर पर बेरोजगार होंगे। जबकि प्लांट बंद होने से अप्रत्यक्ष तौर पर लगभग 25 हजार से अधिक लोगों का रोजगार प्रभावित होगा। इससे बड़ी संख्या में न केवल बेरोजगारी बढ़ेगी बल्कि तेजी से पलायन भी होगा।

लक्ष्मीपुर कांग्रेस एमएलए पवित्र सउता ने बताया कि वेदांता कंपनी के मालिक उड़ीसा माइनिंग कार्पोरेशन के अधिकारियों के साथ सांठगांठ बेहद कम कीमत में बॉकसाइट खरीद रहे है, जबकि दूसरी कंपनियां बॉकसाइट के लिए तीन गुना अधिक कीमत दे रही है। ओड़िशा माइनिंग कार्पोरेशन के अधिकारियों के भ्रष्टाचार के कारण हर साल सरकार को अरबों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
सूटकेस के खेल से सरकार कंगाल
स्थानीय लोगों ने बताया कि वेदांता की कारगुजारियों को दबाने के लिए अधिकारियों को सूटकेस भिजवाएं जाते हैं। अधिकारियों को गिफ्ट में सूटकेस मिलन से सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान हो रहा है। ओडिशा माइनिंग कार्पोरेशन वेंदाता ग्रुप से प्रति टन बॉकसाइट के लिए 1100 रुपये लेता है। जबकि आदित्य बिरला ग्रुप प्रति टन बॉकसाइट के लिए 3100 रुपये ओडिशा माइनिंग कार्पोरेशन को देता है। वहीं तीसरी कंपनी लगभग 3300 रुपये प्रति टन बॉकसाइट के लिए भुगतान कर रही है। अगर इस धनराशि को तीन मिलियन टन से तुलना की जाए तो ओडिशा सरकार को अरबों के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
25000 से अधिक लोग आ जाएंगे सड़क पर
राज्य सरकार अगर वेदांता ग्रुप को छह मिलियन टन बॉकसाइट आवंटन को मंजूरी दे देती है तो इससे आदित्य बिरला ग्रुप का नया प्लांट शुरू होने से पहले ही बंद हो जाएगा, इससे 10000 से अधिक युवा सीधे बेरोजगार हो जाएंगे, जबकि 25000 से अधिक लोग अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे। राज्य सरकार एक ओर जहां रोजगार देने की बात कर रही है वहीं कुछ अधिकारियों की जेब भरने के लिए हजारों लोगों को सड़क पर लाने की तैयारी कर रही है।
ओडिशा माइनिंग कार्पोरेशन (ओएमसी) और वेदांता ग्रुप की इस जनविरोधी नीति का सभी पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया। जिसमें रायगड़ा कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद पांडा, रायगड़ा कांग्रेस के महासचिव पार्था वर्धन, कांग्रेस उपाध्यक्ष संकर्षण मंगराज, लक्ष्मीपुर कांग्रेस एमएलए पबित्रा सउंता, राजेंद्र धुरिया, दौला चौधरी, कंसारीगुड़ा विकास परिषद, बीजेपी, बीएसपी, बीजेडी, कांग्रेस के सभी नेता और बड़े पैमाने पर स्थानीय लोग शामिल थे।

























































