पटना: बिहार विधानसभा का चुनाव रिजल्ट आने के बाद नई सरकार के गठन की तैयारी में एनडीए जुट गया है. अभी तक की जानकारी यही है कि नए मंत्रिमंडल में भाजपा और जेडीयू के बराबर-बराबर 16-16 सदस्य होंगे. चिराग पासवान की एलजेपीआर और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम के साथ जीतन राम मांझी की पार्टी हम को मंत्रिमंडल में जगह तय की गई है. नई सरकार के शपथ ग्रहण के पूर्व नीतीश कुमार ने राज्यपाल से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप दिया है. साथ ही नई सरकार के गठन का दावा भी पेश कर दिया है. चूंकि एनडीए को स्पष्ट और प्रचंड बहुमत मिला है, इसलिए विधायकों की परेड की नौबत नहीं आई.
हो रही थी नाराजगी की चर्चा
विपक्ष के लोग कह रहे थे कि भाजपा इस बार नीतीश कुमार की जगह अपना सीएम बनाएगी. यह आशंका इसलिए जाहिर की जा रही थी कि भाजपा ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात कई बार कही, लेकिन सीएम वे ही बनेंगे, यह बताने से बचती रही. अब तक बिहार में बड़े भाई की भूमिका में रहे नीतीश के जेडीयू को जब इस बार भाजपा ने बराबरी पर ला दिया तो यह शंका बलवती हो गई थी. भाजपा के परदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने अब घोषणा कर दी है कि नीतीश कुमार ही सीएम बनेंगे तो सारी शंकाएं निर्जामूल हो गई हैं.
BJP ने दिया नीतीश का साथ
भाजपा पर 2020 से ही नीतीश कुमार को निपटाने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन भाजपा ने हर मौके पर हनुमान की तरह साबित किया है कि उसके दिल में नीतीश के लिए कितना सम्मान है. भाजपा ने जेडीयू को 43 सीटें आने के बाद भी नीतीश को 2020 में सीएम बनाया. भाजपा चाहती तो इस बार भरोसेमंद कुछ सहयोगियों के समर्थन से सरकार बना सकती थी. इसलिए कि चिराग की 19, जीतन राम मांझी की 5, उपेंद्र कुशवाहा की 4 और अपनी 89 सीटों को मिला कर उसके पास 117 सीटें होती हैं. चार-पांच और सीटों का बंदोबस्त तो आसानी से हो सकती है.
BJP गठबंधन धर्म निभाती है
पर, भाजपा ने ऐसा करने के बजाय गठबंधन धर्म का पालन करते हुए नीतीश पर ही फिर भरोसा जताया है. गठबंधन में बड़े दलों को इसी तरह की उदारता दिखानी पड़ती है. एनडीए में यह दिख रहा, लेकिन महागठबंधन में शुरू से ही इसका अभाव रहा है.
9 बार CM, 8 बार इस्तीफा!
चुनाव परिणाम आने के बाद नीतीश का इस्तीफा महज औपचारिकता है. बहरहाल, नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया है. यह भी रोचक तथ्य है कि नीतीश ने 20 वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री पद से 6 बार इस्तीफा दिया है. वे अब तक 9 बार मुख्यमंत्री बने हैं. विधानसभा के खत्म हो रहे कार्यकाल में आखिरी बार उन्होंने 2024 में इस्तीफा दिया था. एनडीए की मदद से उन्होंने 9वीं बार सीएम पद की शपथ ली थी. तब से वे एनडीए के सहयोग से सीएम हैं.
नीतीश ने कब-कब दिया इस्तीफा
नीतीश कुमार ने पहली बार 3 मार्च 2000 को सीएम पद की शपथ ली थी. हफ्ते भर बाद उन्हें बहुमत साबित करना था. नाकाम रहने पर उन्हें 10 मार्च को इस्तीफा देना पड़ा. दूसरी बार 2010 में तीसरी बार सीएम कुर्सी संभालने से पहले औपचारिकता निभाने के लिए इस्तीफा राज्यपाल को सौंपा. तीसरी बार 17 मई 2014 को उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दिया था. लोकसभा चुनाव में एनडीए से अलग होकर जेडीयू ने चुनाव लड़े, लेकिन करारी शिकस्त मिली. हार की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी और अपने विश्वस्त जीतन राम मांझी को सीएम बनाया.
2015 में महागठबंधन के साथ जेडीयू ने विधानसभा चुनाव लड़ा और नीतीश सीएम बने. पर, वे महागठबंधन से 2017 में अलग हो गए और सीएम पद से 26 जुलाई 2017 को इस्तीफा देकर एनडीए की ओर से सीएम बने. कभी महागठबंधन तो कभी एनडीए में आवाजाही के दौरान चार बार और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. एक बार 9 अगस्त 2022 को और दूसरी बार 28 जनवरी 2024 को उन्होंने सीएम पद से त्यागपत्र दिया. 17 नवंबर 2025 को उनका आठवां इस्तीफा हुआ है.

























































