भुवनेश्वर। दुनिया भर में फैले महाप्रभु जगन्नाथ के भक्तों के लिए ओडिशा सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में जल्द ही ‘ई-हुंडी’ (E-Hundi) सेवा की शुरुआत होने जा रही है।
इस डिजिटल पहल के बाद देश और विदेश में रहने वाले करोड़ों श्रद्धालु बिना पुरी आए भी बेहद आसानी से मंदिर को ऑनलाइन दान भेज सकेंगे। सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य दान प्रक्रिया को अधिक सुलभ, पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।
‘समर्पण ऐप’ के जरिए इसी महीने शुरू होगी सेवा
राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि ऑनलाइन दान की यह पूरी प्रक्रिया ‘समर्पण ऐप’ के माध्यम से संचालित की जाएगी। संभावना जताई जा रही है कि इसी चालू माह के भीतर इस सेवा को लाइव कर दिया जाएगा।
ई-हुंडी के माध्यम से डिजिटल रूप से प्राप्त होने वाली पूरी राशि सीधे श्री जगन्नाथ मंदिर के आधिकारिक खाते में जाएगी और इसका उपयोग केवल मंदिर के विकास, रख-रखाव तथा श्रद्धालुओं से जुड़े कल्याणकारी कार्यों में ही किया जाएगा।
ऑनलाइन दान पर मिलेगा टैक्स बेनिफिट, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
कानून मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस ई-हुंडी सेवा के माध्यम से किए जाने वाले दान पर दाताओं को आयकर कानून (Income Tax Law) के तहत नियमानुसार कर लाभ (टैक्स बेनिफिट) भी प्रदान किया जाएगा। चूंकि मामला ऑनलाइन लेन-देन से जुड़ा है, इसलिए सरकार साइबर सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है।
ऑनलाइन दान प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और फुलप्रूफ बनाने के लिए कड़े साइबर सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं। डिजिटल ठगी या किसी भी तरह के वित्तीय दुरुपयोग को रोकने के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र (Security Mechanism) विकसित किया जा रहा है।
मंदिर की भूमि के लिए आएगी ‘यूनिफॉर्म सेटलमेंट पॉलिसी’
ई-हुंडी सेवा के साथ-साथ ओडिशा सरकार भगवान जगन्नाथ की संपत्तियों और जमीनों से जुड़े दशकों पुराने मामलों के स्थाई समाधान के लिए एक ‘समान निपटान नीति’ (Uniform Settlement Policy) लाने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित नीति के तहत, जो लोग लंबे समय से मंदिर की भूमि पर कब्जा करके रह रहे हैं, उन्हें एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत उस जमीन का मालिकाना हक (स्वामित्व अधिकार) दिया जा सकता है।
इसके बदले में कब्जाधारियों को सरकार द्वारा तय किया गया एक निश्चित शुल्क जमा करना होगा, जो सीधे जगन्नाथ मंदिर के कोष में जाएगा। कानून मंत्री ने बताया कि इस महत्वपूर्ण नीति के मसौदे पर आगामी कैबिनेट बैठक में विस्तार से चर्चा की जाएगी।
मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा, जिससे न केवल भूमि विवाद खत्म होंगे बल्कि मंदिर की वित्तीय स्थिति भी मजबूत होगी।

























































