नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के राजा माने जाने वाले सूर्य देव का राशि और नक्षत्र परिवर्तन एक अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय घटना मानी जाती है. पंचांग गणना के अनुसार, कल (27 सितंबर 2026) सूर्य देव ने हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर लिया है. वे इस नक्षत्र में अगले 14 दिनों तक यानी 11 अक्टूबर 2026 तक विराजमान रहेंगे. हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जो ज्योतिष शास्त्र में मन और संवेदनाओं के कारक माने जाते हैं. सूर्य का यह गोचर देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के आर्थिक, व्यापारिक और मानसिक जीवन को व्यापक रूप से प्रभावित करने वाला है.
“सूर्य और चंद्रमा के बीच मित्रता का भाव है, लेकिन सूर्य की तीक्ष्णता जब चंद्रमा के हस्त नक्षत्र पर पड़ती है, तो इसका सीधा असर जातक के निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक दृढ़ता पर होता है. कल यह गोचर संपन्न होने के बाद आज से ब्रह्मांडीय ऊर्जा में बदलाव आ चुका है. हस्त नक्षत्र का संबंध हाथ के हुनर, शिल्प और वाणिज्य से भी है. इसलिए अगले दो हफ्तों तक बाजार की चाल और लोगों की कार्यशैली में बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे. जहां कुछ राशियों के लिए यह समय करियर में बड़ी छलांग लगाने का है, वहीं तीन विशेष राशियों के लिए यह आत्ममंथन और फूंक-फूंक कर कदम रखने का दौर है.”
इन 3 राशियों को बरतनी होगी विशेष सावधानी
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस नक्षत्र परिवर्तन का सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव मिथुन, कन्या और धनु राशि के जातकों पर देखने को मिल सकता है. इन जातकों को आज से ही अपने करियर और वित्तीय मामलों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है:
मिथुन राशि: इस राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर आत्मविश्वास में कमी ला सकता है. कार्यक्षेत्र में गुप्त शत्रुओं और विरोधियों की सक्रियता बढ़ेगी, जिससे पेशेवर जीवन में चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं. वित्तीय मोर्चे पर अनावश्यक खर्चों में बढ़ोतरी होने से संचित धन प्रभावित हो सकता है, इसलिए बजट का विशेष ध्यान रखें.
कन्या राशि: कन्या राशि के व्यापारिक और नौकरीपेशा जातकों को कार्यक्षेत्र में काम के अत्यधिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है. नई जिम्मेदारियां मानसिक तनाव को बढ़ाएंगी. इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वैचारिक मतभेद होने की आशंका है, जिससे आपके मान-सम्मान पर आंच आ सकती है. कोई भी बड़ा आर्थिक निवेश करने से बचें.
धनु राशि: इस राशि के जातकों को कड़ी मेहनत के बावजूद अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने में विलंब हो सकता है, जिससे निराशा की भावना पनपेगी. व्यापार में हाथ आए कुछ अच्छे अवसर हाथ से निकल सकते हैं. पारिवारिक जीवन में भी संपत्ति या किसी अन्य विषय को लेकर आपसी मतभेद गहराने की आशंका है.
नकारात्मक प्रभावों को कम करने के प्रामाणिक उपाय
सूर्य के इस गोचर जनित दोषों के निवारण और शुभ फलों की प्राप्ति के लिए जातकों को नियमित रूप से शास्त्रीय उपायों का पालन करना चाहिए.
नियमित सूर्य अर्घ्य: प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्योदय के समय तांबे के पात्र में शुद्ध जल लेकर, उसमें रोली और लाल फूल डालकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें. यह क्रिया आत्मबल और सामाजिक प्रतिष्ठा को मजबूत करती है.
मंत्र साधना: मानसिक विकारों और तनाव से मुक्ति के लिए रोज सुबह शांत चित्त होकर सूर्य के प्रभावी मंत्र “ॐ घृणि सूर्याय नमः” अथवा “ॐ सूर्याय नमः” का कम से कम 108 बार (एक माला) जाप करें.
सद्कार्य एवं दान: रविवार के दिन विशेष रूप से किसी जरूरतमंद अथवा ब्राह्मण को तांबा, गेहूं, गुड़ या लाल वस्त्रों का दान करें. इससे सूर्य जनित कुंडली दोष शांत होते हैं.






















































