भुवनेश्वर। ओडिशा के जंगलों में लकड़ी माफिया का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालात यह हैं कि रोज कहीं न कहीं अवैध कटाई की घटनाएं सामने आ रही हैं। चंदन जैसे कीमती पेड़ों के साथ साल और पियाशाल को भी बड़े पैमाने पर काटकर तस्करी की जा रही है। दिनदहाड़े हो रही इन घटनाओं के बावजूद वन विभाग इसे पूरी तरह रोक पाने में नाकाम साबित हो रहा है।
पिछले दो वर्षों के सरकारी आंकड़े स्थिति की गंभीरता को बयां करते हैं। इस दौरान अवैध कटाई के 943 मामले दर्ज किए गए, जबकि 466 माफियाओं को गिरफ्तार किया गया। 281 वाहनों को भी जब्त किया गया।
इसके बावजूद गंजाम, गजपति, कोरापुट, रायगढ़ा, मलकानगिरी, कंधमाल, नयागढ़, मयूरभंज, केन्दुझर और कटक जिलों में लकड़ी चोरी का सिलसिला जारी है।
हर साल बढ़ रहे मामले
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 515 मामले दर्ज हुए थे और 258 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं 2025-26 में 428 मामले सामने आए और 208 लोगों को पकड़ा गया। चिंताजनक बात यह है कि जेल से छूटने के बाद कई आरोपी फिर से उसी अवैध धंधे में सक्रिय हो जाते हैं।
जब्ती के आंकड़े भी चिंताजनक
2024-25 में 614.80 क्यूबिक मीटर लकड़ी और 142 वाहन जब्त किए गए थे, जबकि 2025-26 में 492.53 क्यूबिक मीटर लकड़ी और 139 वाहन जब्त हुए। आंकड़े बताते हैं कि अवैध कटाई का नेटवर्क अभी भी मजबूत बना हुआ है।
जंगलों में आग लगाकर भी कर रहे खेल
लकड़ी माफिया अब जंगलों में आग लगाकर पेड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं और बाद में उन्हें काटकर ले जाते हैं। इतना ही नहीं, वन्यजीव भी इनके निशाने पर हैं।
3 साल में 3,074 शिकारी गिरफ्तार
वन्यजीव शिकार के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले तीन वर्षों में 3,074 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वर्ष 2022-23 में 785, 2023-24 में 1,119 और 2024-25 में 1,170 शिकारी पकड़े गए।
एआई कैमरों से उम्मीद
वन विभाग का दावा है कि जंगलों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। सिमिलिपाल में लगाए गए एआई कैमरों की मदद से पिछले दो वर्षों में सैकड़ों माफियाओं और शिकारियों को पकड़ा गया है। अब राज्य के अन्य जंगलों में भी इस तकनीक को लागू करने की तैयारी है।

























































