नई दिल्ली। शनि जयंति का पर्व हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव और छाया देवी के पुत्र शनि देव का जन्म इसी दिन हुआ था। इस साल यह पर्व 16 मई को मनाया जाएगा। इस दिन शनिवार होने से शनि अमावस्या का भी योग बन रहा है। शनि अमावस्या पर शनि जयंती का होना अत्यंत शुभ फलदायी माना जा रहा है।
माना जाता है कि शनि अमावस्या के दिन विधि-विधान से शनि देव की पूजा और व्रत करने से साढ़ेसाती और ढैय्या में राहत मिलती है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय 5 राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव है। जहां मेष, कुंभ और मीन राशि पर साढ़ेसाती चल रही है, वहीं सिंह और धनु राशि पर ढैय्या चल रही है। ऐसे में शनि जयंती पर कुछ विशेष उपाय करने से इन राशियों के जातकों को राहत मिल सकती है। शनि जयंति के मौके पर ये जातक यहां बताए जा रहे 5 में से कोई भी एक उपाय कर सकते हैं।
शनि जयंती पर साढ़ेसाती और ढैय्या के उपाय
शनि जयंती के अवसर पर मेष, कुंभ, मीन, सिंह और धनु राशि के जातक व्रत कर सकते हैं। साथ ही, शनिदेव की विधि-विधान से पूजा करें, शनि चालीसा और शनि स्तोत्र’ का पाठ करें। शनि मंत्र ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः का जाप भी कर सकते हैं।
शनि जयंती के दिन इन 5 राशिवालों को शनि मंदिर में जाकर सरसों के तेल से उनका अभिषेक करना चाहिए। इस उपाय को करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और साढ़साती-ढैय्या में राहत मिलती है।
साढ़ेसाती के प्रभाव वाली मेष, कुंभ और मीन राशियों को हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। शनि जयंती पर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें। हनुमान जी की पूजा करने वालों पर शनिदेव कृपा करते हैं।
सिंह और धनु राशिवालों पर शनि की ढैय्या का प्रभाव है। इन लोगों को शनि जयंती के अवसर पर पीपल के पेड़ के नीचे एक चौमुखी दीपक का उपाय करना चाहिए। दीपक जलकार पेड़ की 7 बार परिक्रमा करें।
शनि जयंती के अवसर पर छाया दान करने से भी लाभ होता है। कांसे या स्टील के बर्तन में सरसों तेल भर दें। फिर उसमें अपना चेहरा देखें। उसके बाद उस तेल को बर्तन समेत दान कर दें।

























































