भुवनेश्वर। भगवान श्रीजगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रीजगन्नाथ मंदिर की परंपरागत अनुष्ठानिक व्यवस्था से जुड़े छत्तिशा निजोग (Chhatisa Nijog) ने आगामी प्रमुख पर्वों—स्नान यात्रा, रथ यात्रा, बहुड़ा यात्रा, सुनाबेश और नीलाद्रि विजे के लिए विस्तृत अनुष्ठानिक कार्यक्रम को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। यह निर्णय मंदिर प्रशासन, सेवायत प्रतिनिधियों तथा संबंधित अनुष्ठान उप-समितियों की एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया।
नीलाद्रि भक्त निवास में आयोजित इस बैठक में अध्यक्षता श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक डॉ. अरबिंद कुमार पाढ़ी ने की। बैठक में आगामी पर्वों की तैयारियों, अनुष्ठानों के क्रम, प्रशासनिक समन्वय तथा भीड़ प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि राजेंद्र अभिषेक से लेकर नीलाद्रि विजे तक (24 जून से 27 जुलाई) के सम्पूर्ण अनुष्ठानिक कैलेंडर को अंतिम रूप दे दिया गया है।
डॉ. पाढ़ी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि स्नान पूर्णिमा और रथ यात्रा जैसे प्रमुख आयोजनों के लिए अनुष्ठानिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होंने बताया कि मंदिर सेवायतों के बीच समन्वय और कार्यप्रणाली पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया है, ताकि सभी धार्मिक अनुष्ठान समयबद्ध और व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सकें। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आगामी पर्वों की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए रत्न भंडार की सूचीकरण (इन्वेंट्री) प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, जिसे बाद में पुनः शुरू किया जाएगा।
पुरी रथ यात्रा की फाइल फोटो
मंदिर प्रशासन ने सभी सेवायतों से सहयोग की अपील की है ताकि अनुष्ठानों का निर्विघ्न संचालन सुनिश्चित किया जा सके और लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित रूप से नियंत्रित किया जा सके। सेवायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन को पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि वे परंपरागत धार्मिक प्रक्रियाओं को समयबद्ध और अनुशासित तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आगामी आयोजनों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा 5 जून को श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति की बैठक में की जाएगी, जिसमें सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े सभी बिंदुओं पर अंतिम निर्णय लिए जाएंगे। स्नान पूर्णिमा का विस्तृत कार्यक्रम पवित्र देवस्नान पूर्णिमा 29 जून को आयोजित की जाएगी।
अनुमोदित कार्यक्रम के अनुसार प्रातः 4:30 बजे मंगल आरती से अनुष्ठानों की शुरुआत होगी। इसके बाद 5:00 बजे से 7:00 बजे तक द्वार लगी और पुष्पांजलि की रस्में संपन्न की जाएंगी। इसके पश्चात भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की पंहड़ी परंपरागत रूप से निकाली जाएगी। प्रातः 9:00 बजे मंगल आरती के पश्चात दोपहर 12:00 बजे से 2:00 बजे तक स्नान विधि और जल बेजी जैसे अनुष्ठान संपन्न होंगे। दोपहर 3:30 बजे छेरा पहनरा (स्वर्ण झाड़ू सेवा) की परंपरा निभाई जाएगी। इसके बाद 4:00 बजे से 5:00 बजे के बीच भगवान का प्रसिद्ध हाथी वेश (हाथी रूप धारण) आयोजित किया जाएगा। रात्रि 11:00 बजे से 2:00 बजे तक देवताओं की वापसी पंहड़ी निकाली जाएगी।
सेवायतों ने आश्वासन दिया है कि सभी प्रमुख अनुष्ठान जैसे पंहड़ी बेजे, जल बिजे, जल लग्गी, छेरा पहँरा और हाथी वेश पूर्ण अनुशासन के साथ संपन्न किए जाएंगे। रथ यात्रा का कार्यक्रम इस वर्ष रथ यात्रा 16 जुलाई को आयोजित की जाएगी। प्रातः 6:00 बजे मंगल आरती के साथ अनुष्ठानों की शुरुआत होगी, जिसके बाद पारंपरिक धार्मिक विधियाँ संपन्न की जाएंगी। सुबह 8:00 बजे से 9:00 बजे तक गोपाल बल्लभ और सकाल धूपा की रस्में निभाई जाएंगी। सुबह 9:00 बजे रथ प्रतिष्ठा के बाद 9:15 बजे मंगलार्पण किया जाएगा। इसके बाद 9:30 बजे से 12:30 बजे तक भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य पंहड़ी यात्रा निकाली जाएगी। दोपहर 12:30 बजे से 1:00 बजे के बीच मदनमोहन बेजी संपन्न होगी।
इसके बाद दोपहर 2:00 बजे से 3:00 बजे तक छेरा पहँरा की परंपरा निभाई जाएगी। 3:00 बजे से 4:00 बजे के बीच रथों में रस्सियाँ जोड़ने और घोड़ों एवं सारथियों से संबंधित तैयारियाँ पूरी की जाएंगी। शाम 4:00 बजे से तीनों दिव्य रथों के खींचने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। डॉ. पाढ़ी ने आशा व्यक्त की कि सभी पक्षों के सहयोग से इस वर्ष की रथ यात्रा शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और सुरक्षित रूप से संपन्न होगी। उन्होंने पिछले वर्ष की कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बार सभी कमियों को दूर करने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं और सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है।
अनुष्ठानिक तिथियों की सूची अनुमोदित कैलेंडर के अनुसार प्रमुख धार्मिक तिथियाँ इस प्रकार हैं । 24 जून को राजेंद्र अभिषेक, 25 जून को रुक्मिणी हरण एकादशी, 26 जून को चंपका द्वादशी, 27 जून को दैतापति प्रवेश, 29 जून को देवस्नान पूर्णिमा, 14 जुलाई को नेत्रोत्सव एवं नवयौवन दर्शन, 16 जुलाई को रथ यात्रा, 20 जुलाई को हेरा पंचमी, 23 जुलाई को नवमी संध्या दर्शन, 24 जुलाई को बहुड़ा यात्रा, 25 जुलाई को सुनाबेशा तथा 27 जुलाई को नीलाद्रि विजय। पुलिस एवं सेवायत समन्वय बैठक इसी क्रम में पुरी पुलिस और दैतापति निजोग के प्रतिनिधियों के बीच पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एक समन्वय बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता पुरी के पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह ने की। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा न केवल ओडिशा बल्कि पूरे विश्व के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक है, इसलिए इसका सफल आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों और सेवायतों के बीच प्रभावी समन्वय से ही त्योहार को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित बनाया जा सकता है। बैठक में भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही पर विशेष जोर दिया गया। दैतापति निजोग के प्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
श्रीजगन्नाथ मंदिर की छत्तिशा निजोग एवं नीति उप-समिति की बैठकें
स्नान पूर्णिमा की सुरक्षा समीक्षा इसी बीच, केंद्रीय रेंज के पुलिस महानिरीक्षक डॉ. सत्यजीत नायक ने पुरी में सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। वे पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ श्रीजगन्नाथ मंदिर पहुंचे और विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित की जा रही है। इसके साथ ही ग्रैंड रोड (बड़ा डांडा) पर विशेष यातायात गलियारों, आपातकालीन वाहनों के निर्बाध आवागमन, 24×7 सीसीटीवी निगरानी और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की व्यवस्था की गई है।
डॉ. नायक ने कहा कि ओडिशा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक अनुभव प्रदान करना है। उन्होंने सभी नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की कि वे सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और प्रशासन का सहयोग करें ताकि सभी धार्मिक अनुष्ठान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें। इस प्रकार, पुरी में आगामी रथ यात्रा और स्नान यात्रा के लिए धार्मिक परंपरा, प्रशासनिक तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक समन्वय सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे यह विश्वप्रसिद्ध उत्सव और भी भव्य, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके।

























































