नई दिल्ली। भारतीय मुद्रा ‘रुपये’ के लिए 15 मई का दिन काफी निराश करने वाला रहा, क्योंकि रुपया शुक्रवार को रिकॉर्ड निचले स्तरों पर चला गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, डॉलर में लगातार मजबूती और अमेरिकी नीति निर्माताओं के कड़े रुख के कारण रुपये पर दबाव पड़ा और यह 96 रुपये प्रति डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया।
भारतीय मुद्रा बाद में 21 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 95.97 पर बंद हुई। हाल के हफ्तों में, भारत में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण आयात बिल में वृद्धि होने से रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा बनकर उभरा है।
रुपये में कमजोरी के कारण
रुपये की कमजोरी पर सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पबारी ने कहा कि उम्मीद से बेहतर अमेरिकी खुदरा बिक्री आंकड़ों और मजबूत श्रम बाजार के आंकड़ों के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक कटौती की बाजार की उम्मीदें कम होने से डॉलर में मजबूती बनी हुई है।
उन्होंने कहा, “जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की ओर रुख करते हैं।”
100/$ तक जा सकता है रुपया?
LKP सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा है कि अगर मौजूदा वैश्विक हालात लंबे समय तक बने रहे तो 2026 के अंत तक रुपया 100 प्रति डॉलर तक पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते सप्लाई में व्यवधान की आशंकाओं के मद्देनजर, ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
भारत, अपनी जरुरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर आयात बिल में वृद्धि और डॉलर की मजबूत मांग को दर्शाती हैं, जिससे रुपये पर दबाव पड़ता है।

























































