नई दिल्ली: साल 2026 के विधानसभा चुनावों ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी है। इस चुनावी चक्र में भाजपा नीत NDA ने 5 में से 3 राज्यों- असम, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम किया है। वहीं, दक्षिण भारत के दो राज्यों- तमिलनाडु और केरल—के नतीदों ने सबको चौंका दिया है।
पश्चिम बंगाल: दीदी के किले में सेंध, भाजपा का ऐतिहासिक उदय
करीब पांच दशकों तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन के बाद, पश्चिम बंगाल में बड़ा उलटफेर हुआ है। भाजपा राज्य की 294 सीटों में से 206 सीटें पहली बार सरकार बनाने की ओर अग्रसर है। ममता बनर्जी की TMC मात्र 80 सीटों पर सिमटती दिख रही है।
तमिलनाडु: ‘सुपरस्टार’ विजय की धमाकेदार एंट्री
तमिलनाडु की राजनीति में पिछले 60 सालों से चले आ रहे द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के वर्चस्व को अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK ने ध्वस्त कर दिया है। 234 सीटों वाली विधानसभा में TVK 108 सीटों पर जीती है, जिससे विजय का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।
केरल और असम: सत्ता परिवर्तन और निरंतरता
केरल: ‘एक बार तुम, एक बार हम’ की अपनी पुरानी परंपरा पर लौटते हुए केरल ने वामपंथी LDF को नकार कर कांग्रेस नीत UDF को चुना है। UDF 140 में से 100 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
असम: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपना जादू बरकरार रखा है। BJP गठबंधन 126 में से 100 सीटें जीतकर सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को मात देने में सफल रहा है।
विपक्ष (INDIA गठबंधन) के लिए अस्तित्व का संकट
इन परिणामों ने ‘INDIA’ गठबंधन के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन जैसे कद्दावर क्षेत्रीय नेताओं की हार ने 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए विपक्ष को बैकफुट पर धकेल दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है- यह नतीजे बताते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष का उभार एक क्षणिक लहर थी। भाजपा ने बंगाल और असम जैसे राज्यों में अपनी पकड़ और मजबूत की है, जबकि विपक्ष बिखरता नजर आ रहा है।
कांग्रेस: ‘हार में भी जीत’ का फॉर्मूला
दिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु और असम में पिछड़ने के बावजूद कांग्रेस अब विपक्षी खेमे में ‘पहली प्राथमिकता’ बन गई है। ममता और स्टालिन के कमजोर होने से अब गठबंधन के भीतर कांग्रेस की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाना मुश्किल होगा। केरल की जीत ने पार्टी के लिए ‘संजीवनी’ का काम किया है।
मोदी मैजिक और RSS की रणनीति
पश्चिम बंगाल की जीत में प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों और RSS के जमीनी कार्य का बड़ा हाथ रहा। संघ ने बंगाल में “हिंदू अस्तित्व की लड़ाई” का नैरेटिव सेट किया, जिसने ध्रुवीकरण को भाजपा के पक्ष में मोड़ दिया। हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के बाद अब भाजपा का अगला लक्ष्य उत्तर प्रदेश (2027) है, जहां वह इसी गति के साथ उतरना चाहेगी।
एग्जिट पोल: कहीं खुशी, कहीं गम
इस बार एग्जिट पोल्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। जहां Axis My India ने तमिलनाडु में विजय की TVK की लहर को सही पहचाना, वहीं कई दूसरे पोल वहां DMK की जीत का अनुमान लगा रहे थे, जो पूरी तरह गलत साबित हुए। हालांकि, बंगाल और केरल के लिए अधिकांश पोल सही दिशा में रहे।

























































