नई दिल्ली। भारत में इंजीनियरिंग, मेडिकल, विश्वविद्यालय और रिसर्च प्रवेश परीक्षाओं का नाम आते ही जिस संस्था का सबसे ज्यादा उल्लेख होता है, वह है नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, जो पिछले कुछ वर्षों से लाखों छात्रों के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ी है। मगर जितनी तेजी से इसकी भूमिका बढ़ी, उतनी ही तेजी से विवाद भी बढ़े। खासकर नीट, जेईई और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियां और परीक्षा प्रबंधन को लेकर एनटीए लगातार सवालों के घेरे में रही है।
NTA का गठन कब और क्यों हुआ?
भारत सरकार ने नवंबर 2017 में NTA की स्थापना को मंजूरी दी। इसे शिक्षा मंत्रालय (तब मानव संसाधन विकास मंत्रालय) के तहत एक स्वायत्त और स्वयं-संचालित संस्था के रूप में बनाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य देश की बड़ी प्रवेश परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना था।
NTA बनने से पहले अलग-अलग परीक्षाएं अलग-अलग एजेंसियां आयोजित करती थीं। उदाहरण के लिए सीबीएसई, जेईई मेन और नीट आयोजित करती थी, तो यूजीसी द्वारा यूजीसी नेट को आयोजित किया जाता था। इसके अलावा कई विश्वविद्यालय अपनी अलग प्रवेश परीक्षाएं लेते थे
इससे परीक्षा प्रणाली में असमानता, प्रशासनिक बोझ और पारदर्शिता की कमी की शिकायतें सामने आती थीं। सरकार ने महसूस किया कि देश को एक ऐसी विशेषज्ञ परीक्षा संस्था चाहिए जो केवल टेस्टिंग और असेसमेंट पर केंद्रित हो।
NTA की स्थापना के पीछे मुख्य कारण इस प्रकार हैं।
- पहला कारण- प्रवेश परीक्षाओं का केंद्रीकरण
- दूसरा कारण- परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी सुधार
- तीसरा कारण- सीबीटी(कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) को बढ़ावा
- चौथा कारण- परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता
- पांचवा कारण- पेपर लीक और मानव हस्तक्षेप कम करना
- छठा कारण- अंतरराष्ट्रीय स्तर की टेस्टिंग प्रणाली विकसित करना
NTA कैसे काम करती है?
NTA का पूरा मॉडल “मानकीकृत परीक्षा प्रणाली” पर आधारित है। इसकी कार्यप्रणाली कई स्तरों पर विभाजित होती है, जो इस प्रकार है।
परीक्षा डिजाइन: विशेषज्ञों द्वारा प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं, जिसमें मल्टी-लेयर मॉडरेशन सिस्टम लागू होता है और प्रश्नों को कठिनाई स्तर के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा: एनटीए ने सीबीटी आधारित परीक्षा प्रणाली को तेजी से बढ़ाया, जिससे जेईई मेन, सीयूईटी और कई अन्य परीक्षाएं ऑनलाइन मोड में होने लगीं।
नॉर्मलाइजेशन सिस्टम: कई शिफ्टों में परीक्षा होने पर पर्सेंटाइल स्कोर और नोर्मलाइजेशन फॉर्मूला लागू किया जाता है ताकि अलग-अलग शिफ्टों के कठिनाई स्तर का प्रभाव कम किया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था: बायोमेट्रिक सत्यापन, एआई आधारित निगरानी, लाइव सीसीटीवी मॉनिटरिंग, जैमर और डिजिटल सुरक्षा के साथ एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र जैसे उपाय किए गए। हालांकि इन व्यवस्थाओं के बावजूद कई बार पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोप लगे।
परिणाम और डेटा प्रोसेसिंग: एनटीए बड़े पैमाने पर डिजिटल प्रोसेसिंग सिस्टम का उपयोग करती है। लाखों छात्रों के रिजल्ट कुछ दिनों में जारी किए जाते हैं।
एनटीए कौन-कौन सी परीक्षाएं आयोजित करती है?
आज एनटीए भारत की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसियों में शामिल है। यह कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित करती है, जिनकी डिटेल इस प्रकार है।
एनटीए की शुरुआत के बाद क्या बदलाव आए?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की शुरुआत होने के बाद आए सकारात्मक बदलावों की बात करें तो इसमें सीबीटी परीक्षाओं का विस्तार, रिजल्ट प्रोसेसिंग में तेजी, आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन, एकीकृत परीक्षा प्रणाली, ग्रामीण क्षेत्रों में परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ने को गिना जा सकता है।
अगर चुनौतियों या असफलताओं की बात करें तो इसमें परीक्षाओं और आवेदन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी सर्वर फेल, परीक्षा केंद्रों की अव्यवस्था, नॉर्मलाइजेशन पर विवाद, पेपर लीक के आरोप और पारदर्शिता पर उठते सवालों को शामिल किया जा सकता है।
एनटीए से जुड़े सबसे बड़े विवाद
जेईई मेन सर्वर और तकनीकी समस्याएं: कोविड काल के बाद ऑनलाइन परीक्षा मॉडल बढ़ा तो छात्रों ने वेबसाइट क्रैश, एडमिट कार्ड डाउनलोड न होने और सर्वर फेल होने की शिकायतें कीं। सोशल मीडिया पर हर साल छात्रों का गुस्सा दिखता रहा।
सीयूईटी 2022-25 में तकनीकी गड़बड़ियां: सीयूईटी की शुरुआत को “वन नेशन वन एंट्रेंस टेस्ट” मॉडल माना गया, लेकिन शुरुआती वर्षों में परीक्षा केंद्र बदले गए, पेपर कैंसल हुए, तकनीकी खराबी आई और कई शिफ्ट प्रभावित हुईं इन सबसे छात्रों और विश्वविद्यालयों में असंतोष बढ़ा।
यूजीसी नेट पेपर लीक विवाद: यूजीसी नेट परीक्षाओं में भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे। कई बार सोशल मीडिया पर पेपर वायरल होने के आरोप लगे, जिसके बाद जांच एजेंसियों को दखल देना पड़ा।
नीट 2024 विवाद: एनटीए का सबसे बड़ा विवाद NEET 2024 रहा। इस परीक्षा में, ग्रेस मार्क्स, टॉपरों की असामान्य संख्या, पेपर लीक के आरोपों के अलावा बिहार और अन्य राज्यों में गिरफ्तारी और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शामिल है। इन मुद्दों ने NTA की विश्वसनीयता को बड़ा झटका दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने पूर्व ISRO प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सुधार समिति बनाई।
नीट यूजी 2026 रद्द होने का मामला: 2026 में एनटीए अब तक के सबसे बड़े संकट में घिर गई जब नीट यूजी 2026 परीक्षा को कथित पेपर लीक और “गेस पेपर” विवाद के बाद रद्द करना पड़ा। केंद्र सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान और उत्तराखंड में लीक के संकेत मिले, जो कई प्रश्न कथित रूप से वायरल सामग्री से मेल खाते पाए गए। परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों ने दिल्ली सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किए और सोशल मीडिया पर #BanNTA ट्रेंड हुआ।
“National Trauma Agency” मीम संस्कृति: छात्रों में बढ़ती नाराजगी का असर सोशल मीडिया पर भी दिखा। रेडिट और अन्य प्लेटफॉर्म पर छात्रों ने NTA को व्यंग्य में “National Trauma Agency” कहना शुरू कर दिया।
NTA पर सबसे बड़े आरोप क्या हैं?
अत्यधिक केंद्रीकरण: आलोचकों का कहना है कि एक ही संस्था के पास इतनी बड़ी परीक्षाओं का बोझ होने से त्रुटियां बढ़ती हैं, जो वर्तमान परिस्थियों के चलते साबित भी हो रहा है।
जवाबदेही की कमी: कई मामलों में छात्रों ने आरोप लगाया कि, एनटीए के समक्ष प्रस्तुत की गई शिकायतों का समाधान देर से होता है और डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाता, जिसके चलते पारदर्शिता सीमित है।
परीक्षा सुरक्षा में कमजोरी: तमाम दावों और प्रयासों के बाद भी बार-बार पेपर लीक जैसे आरोप सुरक्षा व्यवस्था के साथ साथ संस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़ा करते हैं।
तकनीकी निर्भरता: सीबीटी आधारित परीक्षाओं में इंटरनेट फेल, सिस्टम हैंग, बिजली कटौती और सर्वर डाउन जैसी समस्याएं सामने आईं हैं, जिसके चलते छात्रों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा है।
सरकार ने सुधार के लिए क्या कदम उठाए?
नीट विवादों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधारों पर जोर दिया है, जिसके लिए दिए गए सुझावों में प्रश्नपत्र एन्क्रिप्शन मजबूत करना, AI आधारित निगरानी, केंद्रों का ऑडिट
डिजिटल ट्रैकिंग, परीक्षा सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय प्रोटोकॉल और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करना शामिल हैं। राधाकृष्णन समिति ने व्यापक सुधार सुझाए, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार कई सुधार अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं।
आज एनटीए भारत की शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण और सबसे विवादित संस्थाओं में से एक बन चुकी है। करोड़ों छात्रों का भविष्य इससे जुड़ा है, इसलिए इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता बन गई है।

























































