नई दिल्ली। ग्रह और मकान के बीच सामंजस्य होने पर कुंडली में मौजूद कुछ सामान्य दोषों का प्रभाव कम हो जाता है। लाल किताब में किसी व्यक्ति या मकान की पहचान को लेकर एक विस्तृत सिद्धांत बताया गया है। इसके अनुसार कुंडली में स्थित ग्रहों के प्रभाव को समझकर व्यक्ति के स्वभाव, व्यक्तित्व और जीवन में होने वाले महत्वपूर्ण परिवर्तनों के बारे में जाना जाता है। सही ग्रह की पहचान और उसके अनुरूप जीवन में सामंजस्य से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
किसी व्यक्ति की कुंडली में जो ग्रह सबसे अधिक प्रबल होता है, उसके गुण उस व्यक्ति के व्यक्तित्व में भी दिखाई देते हैं। उसके स्वभाव, व्यवहार, शारीरिक बनावट और जीवनशैली पर उस ग्रह की छाप देखी जा सकती है। इसलिए यदि कुंडली में सबसे प्रभावशाली ग्रह की पहचान कर ली जाए, तो लाल किताब के सिद्धांतों के अनुसार व्यक्ति के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें समझी जा सकती हैं।
इसी प्रकार प्रत्येक मकान का संबंध भी किसी न किसी ग्रह से होता है, अर्थात मकान की बनावट, संरचना, दिशा, उसमें मौजूद वस्तुएं और उसकी विशेषताएं यह संकेत दे सकती हैं कि वह किस ग्रह से संबंधित है। लाल किताब में अलग-अलग ग्रहों के मकान की पहचान और उनके स्वरूप का विस्तार से वर्णन मिलता है।
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह, विशेष रूप से प्रबल है, जैसे वह ग्रह अपनी उच्च राशि में हो, स्वराशि में हो इत्यादि, और वह व्यक्ति अपने निवास का निर्माण भी उसी ग्रह के अनुकूल करता है, तो इससे उसे सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।
ग्रह और मकान के बीच सामंजस्य होने पर कुंडली में मौजूद कुछ सामान्य दोषों का प्रभाव भी कम होने की संभावना मानी जाती है और व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति बढ़ सकती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति उच्च का है यानि बृहस्पति सबसे प्रबल ग्रह है, तो उसके व्यक्तित्व और शारीरिक बनावट में बृहस्पति के गुण दिखाई देते हैं।
यदि बृहस्पति प्रधान व्यक्ति ऐसा मकान बनाता है जो राहु के ग्रह के मकान के अनुरूप हो, तो ग्रह और मकान के बीच असामंजस्य उत्पन्न होगा, जो कष्ट का कारण बनेगा। दुष्परिणाम के रूप में ऐसे व्यक्ति के घर-परिवार में सांस की बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं, तथा वस्तुएं गुम होने की प्रबल संभावनाएं रहती हैं।
लाल किताब के सिद्धांत के अनुसार ऐसा होने पर प्रबल बृहस्पति के शुभ प्रभाव को नुकसान पहुंच सकता है और उसके जीवन में अनुकूल परिणामों में कमी आ सकती है। इसलिए व्यक्ति के लिए कुंडली में प्रबल ग्रह को जानकर अपने निवास को भी उस ग्रह के अनुकूल रखना महत्वपूर्ण माना गया है।




















































