नई दिल्ली: भारत डिफेंस सेक्टर में विदेशों पर अपनी निर्भरता को कम करने की कोशिशों में जुटा है. मिसाइल से लेकर युद्धपोत और एयर डिफेंस तक को देसी तकनीक से डेवलप करने की कोशिश की जा रही है. इस दिशा में सफलता भी मिली है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी वेपन सिस्टम ने अपना जौहर भी दिखाया था, जिससे पूरी दुनिया रूबरू हुई थी. अब भारत का पूरा फोकस पांचवीं पीढ़ी के विमान के साथ ही जेट इंजन डेवलप करने पर है. भारत ने इसको लेकर AMCA प्रोजेक्ट लॉन्च की है. अब फाइटर जेट इंजन को लेकर भी बड़ा करार किया गया है. बताया जा रहा है कि भारत का देसी 5th जेनरेशन फाइटर जेट अमेरिका के F-35 और रूस के Su-57 जैसे मॉडर्न लड़ाकू विमान से कहीं ज्यादा खतरनाक और ताकतवर होगा. फिर चाहे बात इंजन की हो या उसमें इंटीग्रेट होने वाले वेपन की, यह जेट हर मामले में इन दोनों विमानों से बीस होगा.
दरअसल, भारत ने लड़ाकू विमान इंजनों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है. सरकार ने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की गैस टरबाइन रिसर्च इस्टेब्लिशमेंट (GTRE) और फ्रांस की एयरोस्पेस दिग्गज कंपनी सफ्रान के बीच ज्वाइंट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. इस परियोजना का उद्देश्य 120 किलो न्यूटन (kN) कैटेगरी का इंजन विकसित करना है, जिसे बाद में 140 kN तक स्केल-अप किया जाएगा. यह थ्रस्ट क्षमता अमेरिका के F-35, रूस के Su-57 और भारत में सेवा में मौजूद राफेल जैसे आधुनिक फाइटर इंजनों से भी अधिक होगी.
कावेरी से आगे का कदम
DRDO ने कावेरी इंजन कार्यक्रम के जरिए महत्त्वपूर्ण प्रगति की थी, लेकिन वह ऑपरेशनल थ्रस्ट और विश्वसनीयता हासिल नहीं कर सका. इसके चलते भारत को अपने तेजस लड़ाकू बेड़े के लिए अमेरिकी GE-404 और GE-414 इंजनों पर निर्भर रहना पड़ा. नया प्रोजेक्ट इस कमी को पूरा करेगा और भारत को स्वदेशी प्रोपल्शन शक्ति प्रदान करेगा. रोडमैप के अनुसार अगले 12 सालों में नौ प्रोटोटाइप इंजन तैयार किए जाएंगे. शुरुआत 120 kN डेमॉन्स्ट्रेटर से होगी और धीरे-धीरे इसे 140 kN तक उन्नत किया जाएगा. इसका टाइमलाइन भारत के पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम से मेल खाएगा ताकि सीरियल प्रोडक्शन तक स्वदेशी इंजन उपलब्ध हो सके.
सौदों में बढ़ी ताकत
IAF की 114 विमानों की MMRCA 2.0 खरीद और नौसेना के Twin Engine Deck Based Fighter (TEDBF) कार्यक्रम में यह प्रोजेक्ट भारत की सौदेबाजी शक्ति बढ़ाएगा. स्वदेशी इंजन उपलब्ध होने पर भारत ऑफसेट्स और को-प्रोडक्शन की शर्तें और मजबूती से रख सकेगा. बता दें कि 140 kN इंजन AMCA को थ्रस्ट-टू-वेट अनुपात और हथियार क्षमता में बढ़त देगा. F-35 का इंजन जहां 125 kN thrust देता है, वहीं Su-57 का इंजन भी कमोबेश इसी दायरे में है. भारत का 140 kN इंजन BrahMos जैसी सुपरसोनिक मिसाइल को भी एकीकृत करने की क्षमता देगा, जिससे AMCA दुनिया का पहला स्टील्थ फाइटर बन सकता है जो ब्रह्मोस जैसे हथियार को सुपरक्रूज क्षमता के साथ लॉन्च कर सके.
AMCA की हथियार क्षमता में विस्तार
‘इंडिया डिफेंस न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, AMCA के इंटरनल वेपन बे (IWB) में पहले 4 Astra मिसाइलें समाने की योजना थी, लेकिन अब डिजाइन सुधारों के बाद यह कम से कम 6 Astra MK-2 मिसाइलों को स्टेल्थ मोड में ले जा सकेगा. इससे बाहरी पाइलन पर निर्भरता कम होगी और लो ऑब्जर्वेबिलिटी प्रोफाइल बनी रहेगी. यह करार भारत और फ्रांस के बीच दशकों से बने भरोसे का प्रमाण है. 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद लगे प्रतिबंधों के बावजूद फ्रांस ने मिराज-2000 के स्पेयर पार्ट्स और मिसाइल सिस्टम की सपोर्ट जारी रखी थी. अब सफ्रान की ओर से प्रोपल्शन तकनीक हस्तांतरण भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाता है.
ग्लोबल एयरोस्पेस क्लब में भारत
इस प्रोजेक्ट के सफल होने पर भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में आ जाएगा जिनके पास उच्च thrust वाले लड़ाकू विमान इंजनों को डिजाइन और उत्पादन करने की क्षमता है. फिलहाल यह क्षमता अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन तक सीमित है. चीन अभी भी अपने WS-10 और WS-15 इंजनों में कमी महसूस कर रहा है. भारत का यह कदम केवल तकनीकी छलांग नहीं, बल्कि रणनीतिक आत्मनिर्भरता की गारंटी है. स्वदेशी इंजन से लैस AMCA, ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइल क्षमता और अत्याधुनिक एवियोनिक्स के साथ भारत को न केवल एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर भी वायु शक्ति संतुलन में नई ऊंचाई पर पहुंचा सकता है.

























































