नई दिल्ली। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अटूट भक्ति और कठिन तपस्या का पर्व है। इसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रहकर बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं। लेकिन कई बार शारीरिक कमजोरी, या गलती से कुछ खा लेने से व्रत टूट जाता है। ऐसी में महिलाएं काफी परेशान हो जाती हैं कि अब क्या होगा? आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि व्रत टूटने पर क्या करना चाहिए?
क्या व्रत को बीच में छोड़ देना चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार, अगर कोई व्रत अनजाने में टूटा है, तो उसे अपराध नहीं माना जाता। हिंदू धर्म में मानसिक संकल्प की बड़ी महिमा है। अगर आपके मन में व्रत पूर्ण करने की सच्ची श्रद्धा है, तो एक छोटी सी गलती पर पूरे उपवास को बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। शास्त्र कहते हैं कि अनजाने में कुछ खा-पी लिया है, तो व्रत को वहीं से जारी रखना चाहिए।
अनजाने में हुई गलती का प्रायश्चित
स्नान करें – सबसे पहले आचमन करें और हाथ-मुंह धोकर पवित्र हो जाएं। अगर हो पाए, तो दोबारा स्नान कर लें।
माफी मांगे – भगवान विष्णु, माता सावित्री और यमराज के सामने हाथ जोड़कर अपनी भूल स्वीकार करें। फिर इस मंत्र “अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥” का जाप करें।
हवन और दान – व्रत टूटने के दोष को कम करने के लिए गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें या घर में छोटा सा हवन करें। साथ ही, किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को सफेद अनाज, फल व क्षमता अनुसार दान करें। इससे व्रत टूटने का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है।
श्रद्धा का महत्व
शास्त्रों में बताया गया है कि जानबूझकर की गई गलती दोष का कारण बनती है। अगर किसी बीमारी या खास वजह से व्रत टूटा है, तो ईश्वर आपकी भावनाओं को समझते हैं, इसलिए अपनी श्रद्धा कम न होने दें।

























































