नई दिल्ली। दुर्गा अष्टमी की तारीख को लेकर संशय खत्म हुआ तो महा नवमी की तारीख पर कन्फ्यूजन बन गया है. महा नवमी 19 अक्टूबर को है या फिर 20 नवंबर को? 19 अक्टूबर को मनाते हैं तो उस दिन दुर्गा अष्टमी के साथ ही मनाना होगा, वहीं 20 अक्टूबर को मनाते हैं तो उस दिन दशहरा है. तिथि को देखा जाए तो 20 अक्टूबर को नवमी की उदयातिथि मिल रही है तो कुछ लोगों का कहना है कि उस दिन ही व्रत रखना सही है, तो कुछ लोग कह रहे हैं कि दुर्गा अष्टमी के साथ की नवमी उत्तम है. अब इन बातों की वजह से लोग हो गए हैं कन्फ्यूज. ऐसे में जानते हैं कि शास्त्रों में महा नवमी तिथि के निर्धारण के बारे में क्या कहा गया है?
महा नवमी, 19 या 20 अक्टूबर?
सबसे पहले ये जान लेते हैं कि इस साल नवरात्रि की नवमी तिथि कब से कब तक है. इसके लिए हम पंचांग की मदद लेते है.
- नवमी तिथि का प्रारंभ: 19 अक्टूबर, सोमवार, सुबह 10:51 बजे से
- नवमी तिथि का समापन: 20 अक्टूबर, मंगलवार, दोपहर 12:50 बजे
व्रत परिचय के अनुसार, यदि नवमी तिथि में उत्तराषाढ़, पूर्वाषाढ़ या मूल नक्षत्र हो तो वह नवमी बड़े महत्व की होती है. इन तीन नक्षत्रों में से किसी भी एक नक्षत्र वाली महानवमी तीनों लोकों में दुर्लभ मानी गई है.
इस आधार पर देखें तो 19 अक्टूबर को उत्तराषाढ़ नक्षत्र प्रात:काल से लेकर दोपहर 3 बजकर 38 मिनट तक है. नवमी में दोपहर से पूर्व के समय को महत्वपूर्ण माना गया है. 20 अक्टूबर को नवमी की उदयातिथि मिल रही है, लेकिन उत्तराषाढ़ नक्षत्र नहीं मिलेगा. ऐसे में आप 19 अक्टूबर को दुर्गाष्टमी के साथ की महानवमी मनाएं, तो ये आपके लिए उत्तम फलदायी होगी.
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु कहता है कि अगर नवमी तिथि सूर्योदय के बाद प्रारंभ होती है और मध्याह्न काल तक रहती है तो उस दिन नवमी की पूजा और व्रत करना सही है. नवमी तिथि के लिए मध्याह्न काल या फिर पूर्वाह्न व्यापिनी तिथि का विचार करते हैं. इसका कारण यह है कि नवमी की पूजा, हवन और बलिदान का संबंध मध्याह्न काल से है. इसके अनुसार भी 19 अक्टूबर को सूर्योदय बाद ही यानि 06:24 ए एम के बाद नवमी तिथि शुरू हो रही है और मध्याह्न काल में विद्यमान है. ऐसे में आप 19 अक्टूबर को महा नवमी मनाएं.
निर्णय सिंधु नवमी तिथि के लिए त्रिमुहूर्त व्यापिनी की भी बात करता है. इसके अनुसार, अगर सूर्योदय हुआ है और उसके बाद नवमी तिथि 2 घंटे 24 मिनट तक है तो उस दिन नवमी पूजा कर सकते हैं. इसके अनुसार 20 अक्टूबर को उदयातिथि के साथ दोपहर तक नवमी है. फिर आप यहां असमंजस में आ गए, तो परेशान न हो.
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु में कहा गया है कि जब अष्टमी तिथि के साथ नवमी तिथि हो तो वह नवमी अत्यंत शुभ होती है. वह नवमी पूजा और हवन के लिए उत्तम है. ऐसे में 19 अक्टूबर को अष्टमी के साथ नवमी तिथि है. इस आधार पर महा नवमी 19 अक्टूबर की श्रेष्ठ है.
इसकी एक वजह यह भी है कि 20 अक्टूबर को नवमी के साथ दशमी तिथि जुड़ी हुई है. शास्त्रों में दशमी युक्त नवमी का त्याग करने का आदेश है. ऐसी नवमी में हवन, पूजा आदि करने की मनाही है. अब महा नवमी की तारीख को लेकर आपका संशय दूर हो गया होगा.
महा नवमी 2026 मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: 04:43 ए एम से 05:34 ए एम
- अभिजीत मुहूर्त: 11:43 ए एम से 12:29 पी एम
- सर्वार्थ सिद्धि योग: 03:38 पी एम से 20 अक्टूबर को 06:25 ए एम
- रवि योग: 03:38 पी एम से 20 अक्टूबर को 06:25 ए एम
- उत्तराषाढ़ नक्षत्र: प्रात:काल से लेकर दोहपर 03:38 पी एम तक






















































