नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव आज पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बन गया है। खास तौर पर ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ जैसे समुद्री मार्ग पर मंडराते युद्ध के बादलों ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। भारत अपनी जरूरत की अधिकांश एलपीजी (LPG) और नेचुरल गैस का आयात करता है, ऐसे में सप्लाई चेन बाधित होने का सीधा असर हमारे किचन के बजट और उपलब्धता पर पड़ना तय है।
इस संभावित ‘LPG क्राइसिस’ से निपटने के लिए भारत सरकार ने ‘इमरजेंसी रिस्पांस प्लान’ तैयार किया गया है, जिसमें यह स्पष्ट है कि यदि भविष्य में गैस की भारी किल्लत होती है, तो सीमित संसाधनों का वितरण किस आधार पर होगा।
गैस संकंट के बीच किसे मिलेगा पहले LPG सिलेंडर?
- सरकार की लिस्ट में सबसे ऊपर आम नागरिक (Domestic Users) हैं। विशेष रूप से ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि देश के गरीब तबके का चूल्हा जलता रहे।
- मेडिकल सेक्टर में नसबंदी और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए गैस अनिवार्य है। अस्पतालों की सप्लाई को ‘अनइंटरप्टेड’ श्रेणी में रखा गया है।
- सामरिक सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। सीमाओं पर तैनात जवानों और सैन्य मेस के लिए ईंधन का एक विशेष कोटा सुरक्षित रखा जाएगा।
- सरकारी कैंटीन और सामुदायिक रसोई जो बड़ी आबादी का पेट भरती हैं, उन्हें भी वरीयता दी जाएगी।
किन पर लग सकती है पाबंदी?
- संसाधनों की कमी होने पर सरकार का कड़ा रुख कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर (Commercial & Industrial Sector) की ओर रहेगा।
- व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए गैस का उपयोग करने वाले बड़े होटलों को वैकल्पिक ईंधन की ओर रुख करने का निर्देश दिया जा सकता है।
- ऐसी फैक्ट्रियां जहां एलपीजी का उपयोग होता है, उनकी सप्लाई में कटौती की जा सकती है ताकि ‘प्रॉफिट’ से पहले ‘पब्लिक’ की बुनियादी जरूरतें पूरी हों।

























































