नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान युद्ध में अगर किसी ने कमाई की है, तो वो है रूस. रूस ने अमेरिका की ओर से तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में छूट का भरपूर फायदा उठाया और टैंकर भर भरकर तेल की सप्लाई की. तेल निर्यात से रूस से अपनी तिजोरी भर ली है.डिमांड के मुताबिक सप्लायर कम है, तो ऊंची कीमतों पर रूस तेल बेच रहा है. तेल से हर दिन रूस के खजाने में 713 मिलियन यूरो पहुंचे, लेकिन दूसरी तरफ मॉस्को ताबड़तोड़ सोने की सेल कर रहा है. रूस ने 22000 किलो सोना बेच दिया है. एक तरफ तेल से कमाई तो दूसरी ओर सोना बेच रहे रूस की परेशानी युद्ध है.
तेल से रूस की कितनी हो रही है कमाई
होर्मुज बंद दोने की वजह से अमेरिका ने रूसी तेल के निर्यात से प्रतिबंध को हटा दिया. इस प्रतिबंध के हटते ही रूस ने भरपूर तेल का निर्यात किया. The Telegraph के डेटा के मुताबिक रूस से तेलों की इस खेप से 760 मिलियन डॉलर (लगभग 7,150-7,200 करोड़ रुपये) की अतिरिक्त कमाई कर ली है. किवी स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स इंस्ट्रीट्यूट के मुताबिक तेल से रूस की मंथली इनकन 12 अरब से बढ़कर 24 अरब डॉलर पर पहुंच गई है. कमाई में दोगुनी बढ़ोतरी के बावजूद पुतिन सोना क्यों बेच रहे हैं? डेटा के मुताबिक रूस का तेल एक्सपोर्ट रेवेन्यू फरवरी 2026 के 9.75 अरब डॉलर से बढ़कर मार्च 2026 में 19.04 अरब डॉलर यानी करीब 1.77 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है.
रूस ने क्यों बेचा इतना सोना ?
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने साल 2026 में अब तक 21.8 टन यानी करीब 22000 किलो सोना बेच दिया है. रूस के सेंट्रल बैंक का सोने का भंडार अब 2304.76 टन पर पहुंच गया है, जिसमें मार्च के मुकाबले 6.22 टन की गिरावट आई है. दरअसल यूक्रेन के साथ बीते 4 साल से जंग रहते-रहते रूस थक चुका है. रूस को युद्ध से भारी घाटा हो रहा है. बजट घाटा मार्च के अंत तक 61.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. पहले रूस कागजों पर सोने की खरीद बिक्री कर रहा था, लेकिन साल 2025 में पहली बार फिजिकल गोल्ड बेचा गया. बजट घाटे के साथ-साथ रूसी करेंसी का कमजोर होना एक बड़ी वजह है. रूस की करेंसी रूबल कमजोर हो गया है, इसे मजबूत करने और बढ़ाने के लिए रूस सोना बेच रहा है. सोना महंगा है, ऐसे में रूस इस मौके का फायदा उठाना चाहता है.
अपने ही देश में बेच रहा सोना
रूस सोना बेच तो रहा है, लेकिन वह इसे अपने ही देश में बेच रहा है. इस तरह से सोना बेचकर वो ज्यादा से ज्यादा रूबल हासिल करना चाहता है, ताकि युद्ध में उनका इस्तेमाल किया जा सके. बता दें कि साल 2002 से 2025 के बीच रूस से खूब सोना खरीदा है. साल 2008 से 2012 के बीच करीब 500 टन सोना खरीद लिया. इसी तरह से 2014 से 19 के बीच 1200 टन गोल्ड खरीद लिया. साल 2020 में करीब 55 टन सोना खरीदा. अब वो इसमें से कुछ सोना बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है.

























































