नई दिल्ली: कई लोग शौक से पान खाते हैं, वही पान कुछ लोगों की दिनचर्या का एक हिस्सा है पान के पत्ते स्वास्थ के लिए काफी लाभकारी हैं पर क्या आप यह जानते है उसी पान में कुछ चीजों के मिलने पर वह उतने ही हानिकारक हो सकते हैं इतने हानिकारक की यह जानलेवा बीमारी कैंसर को भी न्योता देते हैं अगर आप पान खाते हुए इन कुछ बातों का ध्यान रखते हैं तो आप कैंसर जैसी भयानक बीमारी से बच सकते है
पान का पत्ता कैसे बन जाता है जानलेवा
आप जान लें की लाभकारी पान का पत्ता कैसे बन जाता है जान का दुश्मन, अगर आप सिर्फ पान का पत्ता चबाते हैं तो यह आपके स्वास्थ को कोई हानि नहीं पहुंचाता पर जब इसमें तंबाकू ,सुपारी, गुटका, चुना व तंबाखू वाले मसले मिलते हैं तो यह स्वस्थ के लिए बेहद हानी कारक बन जाते हैं, तंबाखू को मुह के कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है वही साथ ही सुपारी गुटका चुना आदि मिलने से यह खतरा और बढ़ जाता है
कैसे करते हैं यह शरीर पर वार
तंबाकू के पोधे में निकोटिन पाया जाता है. जो बहुत ही जल्दी दिमाग पर असर डालता है जिससे लत बहुत जल्दी लगती है, वही चुना मुंह में घुल कर मुह के अंदर घाव बनाता है. जिससे की तंबाकू सीधा रक्त में जा मिलता है यह धीरे धीरे शरीर में मिल कर उसे खोखला करना शुरू कर देते हैं. निकोटिन दिमाग पर 10 सेकेंड्स में असर करने लगता है व डोपामाइन’ नाम का न्यूरोट्रांसमीटर रिलीज करता है, जिससे कुछ पल के लिए खुशी, संतुष्टि और आराम का अहसास होता है. इसका असर बहुत जल्दी खत्म होता है तब दिमाग फिर से नशे की मांग करने लगता है जिसे तलब या क्रैविंग कहते हैं यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को कुछ देर के लिए सुन्न कर देता है, जिससे व्यक्ति को तनाव कम होने का झूठा भ्रम होता है.
आपको बता दें कि अगर सादा पान है तो इससे कैंसर होने का खतरा न के बराबर है, लेकिन इसमें मिलाया जाने वाला तंबाकू आपके शरीर को कैंसर दे सकता है.
यह कैंसर में कैसे बदल जाता है
लगातार घाव होने और रसायनों के कारण मुंह के अंदर फाइब्रोसिस कड़ापन होने लगता है. यह खतरनाक रसायन मुंह की स्वस्थ कोशिकाओं के केंद्र में मौजूद डीएनए पर हमला करते हैं डीएनए कोड यह तय करता है की कौनसी कोशिका को कब बढ़ाना है व कब मारना पर इनके सेवन से इसका कोड काम करना बंद कर देता है जिससे शरीर का नियंत्रण कोशिकाओं पर काम करना बंद कर देते हैं. डीएनए डैमेज होने के कारण बिगड़ी हुई कोशिकाएं मरती नहीं हैं, बल्कि बहुत तेजी से नई खराब कोशिकाएं बनाने लगती हैं.कुछ ही समय में यह कैंसर का रूप ले लेते हैं.

























































