नई दिल्ली। बाढ़ प्रभावित नेपाल में भारतीय वायुसेना ने राहत सामग्री की पांचवीं खेप पहुंचाई। यह अभियान दिखाता है कि भारत लंबी दूरी तक सैनिकों, भारी उपकरणों और बड़ी मात्रा में राहत सामग्री को तेजी से पहुंचाने की क्षमता रखता है।
नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कुछ ही घंटों बाद भारतीय वायुसेना की पहली राहत उड़ान रवाना हुई। इसके बाद राहत सामग्री की पांचवीं खेप भी पहुंचाई गई। इस साल की शुरुआत में विनाशकारी भूकंप के बाद वेनेजुएला और 2023 में तुर्किये में भी भारतीय वायुसेना ने इसी तरह राहत सामग्री पहुंचाई थी। देश के भीतर भी युद्ध और आपदा के दौरान वायुसेना का परिवहन बेड़ा जरूरत के मुताबिक राहत सामग्री और सैन्य उपकरण पहुंचाता रहा है।
सामरिक हवाई परिवहन क्या है?
सामरिक हवाई परिवहन क्षमता का मतलब दूर-दराज के इलाकों के बीच सैनिकों, भारी सैन्य उपकरणों और बड़ी मात्रा में सामान को कम समय में पहुंचाना है। इसके मुकाबले क्षेत्रीय हवाई परिवहन में एक ही सैन्य क्षेत्र के भीतर सैनिकों और सामान को पहुंचाया जाता है। सामरिक क्षमता के जरिए जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार भी बड़ी मात्रा में सामान और सैनिक पहुंचाए जा सकते हैं।
1947 में श्रीनगर तक पहुंचाए गए सैनिक और सामान
भारत की यह क्षमता आज की नहीं है। 1947 में जम्मू-कश्मीर के अभियानों के दौरान नवगठित भारतीय वायुसेना ने श्रीनगर तक सैनिकों और जरूरी सामान को हवाई मार्ग से पहुंचाया। उस समय हमलावर कबायली श्रीनगर पर कब्जा करने के बेहद करीब पहुंच चुके थे। बाद में पुंछ में भी, जब सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया था, भारतीय वायुसेना ने ब्रिगेडियर प्रीतम सिंह की कमान वाली सैन्य टुकड़ी को करीब एक साल तक हवाई मार्ग से जरूरी सहायता पहुंचाई।
1971 में टंगाइल हवाई कार्रवाई ने बदली युद्ध की दिशा
1971 के युद्ध में भारतीय वायुसेना की टांगेल हवाई कार्रवाई सबसे चर्चित अभियानों में रही। वायुसेना के परिवहन विमानों से पैराट्रूपर्स को पूर्वी पाकिस्तान में दुश्मन की पंक्तियों के पीछे उतारा गया। इस कार्रवाई ने युद्ध को तेजी से निर्णायक दिशा देने में मदद की और युद्ध के अंत को करीब लाने में भूमिका निभाई।
गलवान के बाद लद्दाख में भी दिखी ताकत
2020 में गलवान झड़प के बाद भारतीय वायुसेना ने लद्दाख के अग्रिम इलाकों तक बड़े पैमाने पर सैनिकों, टैंकों, तोपों और जरूरी सामान को पहुंचाया। यह अभियान लगातार जारी रहा। बेहद महत्वपूर्ण समय में हुई इस हवाई तैनाती ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत की सैन्य स्थिति को मजबूत किया। इसी तरह मालदीव में तख्तापलट की कोशिश को रोकने के लिए चलाए गए ऑपरेशन कैक्टस के दौरान भी आगरा स्थित पैराशूट ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स को पहुंचाने में वायुसेना के परिवहन विमानों ने अहम भूमिका निभाई।
कोरोना काल में भी पहुंचाई राहत सामग्री
भारतीय वायुसेना की परिवहन क्षमता का इस्तेमाल केवल युद्ध के दौरान ही नहीं हुआ। कोरोना महामारी के समय भी वायुसेना ने देश के भीतर और विदेशों में राहत सामग्री पहुंचाई। अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों और अलग-अलग जरूरतों के बावजूद इन सभी अभियानों के पीछे एक ही क्षमता काम करती रही-कम समय में भारी मात्रा में सामान को लंबी दूरी तक पहुंचाने की क्षमता।
अमेरिका सबसे आगे, रूस और चीन भी मजबूत
दुनिया में सामरिक हवाई परिवहन के मामले में अमेरिका सबसे आगे है। उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा सामरिक हवाई परिवहन बेड़ा है। वैश्विक रसद और सैनिकों की आवाजाही के लिए उसके पास अलग से हवाई परिवहन कमान भी है। अमेरिका का रसद परिवहन बेड़ा उसके बाद आने वाले चार देशों के संयुक्त बेड़े से भी बड़ा और भारी है। रूस और चीन भी इस क्षेत्र में बड़ी क्षमता रखते हैं, लेकिन पैमाने और पहुंच के मामले में अमेरिका से पीछे हैं।
भारत के पास 11 बोइंग सी-17 विमान
भारत की सामरिक हवाई परिवहन क्षमता अमेरिका की तुलना में छोटी है। भारतीय वायुसेना के पास 11 बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर-3 विमान हैं। प्रत्येक विमान करीब 77 टन सामान ले जाने में सक्षम है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के पास सोवियत दौर के आईएल-76 विमान भी हैं। इनकी संख्या पहले 17 थी, लेकिन उम्र और कल-पुर्जों की कमी के कारण अब करीब 11 से 12 विमान ही उड़ान भरने की स्थिति में बताए जाते हैं।
पुराने बेड़े के बीच भविष्य की तैयारी
बोइंग सी-17 का उत्पादन अब बंद हो चुका है। दूसरी ओर आईएल-76 विमानों का बेड़ा भी करीब 40 साल पुराना हो रहा है। ऐसे में भारतीय वायुसेना अपनी भविष्य की जरूरतों को देखते हुए मध्यम क्षमता वाले परिवहन विमान कार्यक्रम पर काम कर रही है। इसके साथ ही भविष्य में स्वदेशी भारी परिवहन विमान विकसित करने की दिशा में भी नजर है। फिलहाल नेपाल में राहत अभियान जैसे मिशन यह दिखाते हैं कि सीमित बेड़े के बावजूद भारत की सामरिक हवाई परिवहन क्षमता लगातार पूरी ताकत के साथ काम कर रही है।

























































